
रेलवे के नए फरमान
ग्वालियर. रेलवे के एक नए फरमान ने ट्रेनों में ड्यूटी करने वाले टिकट जांच कर्मचारियों (टीटीई) को उलझन में डाल दिया है। टिकट चेक करने के साथ अब उन्हें मेडिकल किट लेकर यात्रियों को दवा देने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। समस्या यह है कि टीटीई डॉक्टर नहीं हैं, न ही उन्हें किसी तरह का चिकित्सकीय प्रशिक्षण दिया गया है। बावजूद इसके यात्रियों की छोटी-बड़ी बीमारियों पर अब उनसे ही दवा की मांग की जा रही है। रेलवे का उद्देश्य यात्रा के दौरान किसी यात्री के अस्वस्थ होने पर उसे तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना था। यह व्यवस्था करीब आठ महीने पहले शुरू की गई, लेकिन अब इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। शिकायत होने पर टीटीई को ट्रेन से उतारकर अधिकारियों के सामने सवाल-जवाब तक झेलने पड़ रहे हैं।
किस आधार पर दें दवा
टीटीई का कहना है कि उनका मूल कार्य टिकट जांच और यात्रियों की यात्रा से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है। मेडिकल किट में सामान्य बीमारियों की दवाएं जरूर हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह दवा देना जोखिम भरा हो सकता है। दवा देने पर गलती का खतरा है, और न देने पर लापरवाही का आरोप।
शिकायत पर झांसी में उतारा गया टीटीई
30 जनवरी को भोपाल से ग्वालियर आ रही तेलंगाना एक्सप्रेस में एक यात्री को दवा नहीं देने की शिकायत पर झांसी स्टेशन पर टीटीई मनीराम मीना को ट्रेन से उतार दिया गया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। इस घटना के बाद टीटीई और ज्यादा दबाव में आ गए हैं।
90 टीटीई रोज किट लेकर चल रहे
ग्वालियर मंडल से करीब 90 टीटीई अपनी ड्यूटी के दौरान मेडिकल किट साथ लेकर चलते हैं। यात्रियों को लगता है कि बीमारी बताने भर से दवा मिलनी चाहिए, जबकि टीटीई खुद तय नहीं कर पा रहे कि कौन-सी दवा दें और कब डॉक्टर को बुलाएं।
रेलवे बोर्ड का आदेश
टीटीई को जो दवा उपलब्ध कराई है। उनकी लिस्ट बॉक्स पर लगी है। यात्री को ज्यादा परेशानी आने पर रेलवे डॉक्टर को बुलाना है। यह रेलवे बोर्ड का आदेश है। हल्की फुल्की बीमारी की दवा ही टीटीई को देना है।
अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम झांसी
Published on:
13 Feb 2026 05:48 pm
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