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मौत बनकर सडक़ों पर घूम रहे 25000 मवेशी, पांच साल में दस ने गवाई जान

नगर निगम अमले की कार्रवाई जारी फिर भी कम नहीं हो रही संख्या शहर की सडक़ों पर आवारा मवेशियों के बढ़ते आतंक से लोगों की जान तक जा रही है,उसके बाद भी निगम सख्त प्लान नहीं बना पा रहा है। यदि देखा जाए तो बीते पांच साल में दस लोगों की मौत इन मवेशी के […]

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25,000 cattle roaming the streets like death

मवेशी को लेकर बैठक लेते निगमायुक्त व अपर आयुक्त।

नगर निगम अमले की कार्रवाई जारी फिर भी कम नहीं हो रही संख्या

शहर की सडक़ों पर आवारा मवेशियों के बढ़ते आतंक से लोगों की जान तक जा रही है,उसके बाद भी निगम सख्त प्लान नहीं बना पा रहा है। यदि देखा जाए तो बीते पांच साल में दस लोगों की मौत इन मवेशी के कारण हो चुकी हैं और 300 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। जबकि मुरार,एबी रोड, मुरार-कुम्हरपुरा, लक्कडख़ाना पुल, राजमाता चौराहा,हजीरा, राममंदिर चौराहा,किलागेट,हजीरा की मुख्य सडक़ों, कॉलोनी, मोहल्ले में आवारा मवेशियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। यह संख्या 25 हजार से अधिक है और इससे जान का खतरा बना हुआ है। जबकि हर दिन इनको पकडऩे के लिए निगम की ओर से दो ट्रैक्टर-टॉली, दो एंबुलेंस पर 21 कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई है। वाहनों में डीजल व कर्मचारियों की सैलरी के नाम पर लाखों रुपए हर महीने खर्च तक किए जा रहे हैं। वहीं मदाखलत का अमला हर दिन 30 से 40 मवेशी को पकडकऱ लाल टिपारा स्थित गोशाला भेजने का दावा कर रह है।

ग्रामीण क्षेत्र से शहर में आ रहे हैं मवेशी
शहर की मुख्य सडक़ों, कॉलोनी-मोहल्लों में आवारा मवेशी आने का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शहर में मवेशियों का आना है। जबकि पूर्व में कर्मचारियों की डयूटी लगाकर शहर में मवेशियों को रोका गया था,लेकिन अब फिर से मवेशी आ रहे है।

हादसों के बाद भी नहीं चेता निगम
शहर की सडक़ों पर जगह-जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात हो चुकी है। आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई कागजों तक सीमित नजर आती है। निगम का अमला केवल सूचना मिलने पर ही मौके पर पहुंचता है, नियमित अभियान नहीं चलाए जा रहे।

सिर्फ दो ट्रैक्टर-टॉली और 21 कर्मचारी
आवारा पशुओं को पकडऩे के लिए निगम के पास महज दो ट्रैक्टर-टॉली और दो एंबुलेंस हैं। पूरे शहर के लिए केवल 21 कर्मचारियों की तैनाती है, जबकि आवश्यकता इससे अधिक बताई जा रही है। कर्मचारियों की कमी के कारण रात में मवेशियों को पकडऩे का अभियान पूरी तरह बंद है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब संसाधन ही नाकाफी हैं तो शहर को सुरक्षित कैसे बनाया जाएगा।

साढ़ के चलते इन्होंने गंवाई जान
-17 मार्च 2021 में बेलदार का पुरा गौतम जाटव मंदिर पर जा रहे थे तभी आवारा साड़ के टक्कर मारने से उनकी मौत हो गई।
-फरवरी 2021 में गुडागुडी का नाका रोड पर अपने तीन दोस्तों के साथ काम से लौट रहे गणेश चौरसिया को सडक़ पर लड़ते हुए सांड़ ने पटक दिया। इससे उसकी मौत हो गई और उसके दोनों साथी घायल हो गए।
-2 मई 2022 में सागरताल निवासी बिल्लो यादव को अचलेश्वर मंदिर के पास सांड ने पटक दिया। इससे उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
-जून 2023 में मुरार क्षेत्र में रहने वाले वृद्द जय किशोर को सांड ने पटक दिया, इससे उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
-12 फरवरी 2024 को गोलपहाडिय़ा स्थित बिजली घर के बाहर बैठे मुंशी सिंह पर सांड ने हमला कर दिया। जिससे उसकी मौत हो गई।