ग्वालियर

प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट सख्त, शहर के हिस्से में छाए रहते हैं धुुएं के बादल

केदारपुर लैंडफिल साइट पर वर्षों से जल रहे कचरे और उससे फैल रहे प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है।
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Clouds of smoke linger over parts of the city.
Clouds of smoke linger over parts of the city.

केदारपुर लैंडफिल साइट पर वर्षों से जल रहे कचरे और उससे फैल रहे प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। युगल पीठ ने नगर निगम को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट पहुंचा, जिसमें याचिकाकर्ता आशुतोष दुबे ने आरोप लगाया है कि नगर निगम कचरा प्रबंधन में पूरी तरह विफल साबित हो रही है और समस्या के स्थायी समाधान के बजाय सिर्फ कचरा इधर-उधर फेंककर अपना भार टाल रही है।

सालों से जल रहा कचरा, फैल रहा जहरीला धुआं

याचिका में कहा गया है कि केदारपुर लैंडफिल साइट पर जमा कचरे में करीब 80 प्रतिशत पॉलीथिन और प्लास्टिक सामग्री है। यहां लंबे समय से कचरे के ढेर में आग लगती रही है, जिससे जहरीला धुआं लगातार वातावरण में फैल रहा है। पॉलीथिन जलने से निकलने वाला धुआं शिवपुरी लिंक रोड तक पहुंच रहा है। सुबह के समय आसमान में काले धुएं के बादल साफ दिखाई देते हैं और आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल जाती है।

आबादी और शिक्षण संस्थानों पर खतरा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि लैंडफिल साइट के आसपास अब बड़ी आबादी बस चुकी है और कई शिक्षण संस्थान भी संचालित हो रहे हैं। लगातार जहरीले धुएं के संपर्क में आने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। याचिका में आशंका जताई गई है कि लंबे समय तक इस प्रदूषण की चपेट में रहने वाले लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

री-साइक्लिंग व्यवस्था नहीं, बढ़ती जा रही समस्या

याचिका में यह भी कहा गया है कि नगर निगम के पास कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और री-साइक्लिंग की प्रभावी व्यवस्था नहीं है। पॉलीथिन और अन्य प्लास्टिक सामग्री को अलग किए बिना सीधे कचरे के ढेर में डाला जा रहा है, जिससे आग लगने और प्रदूषण फैलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि इससे पहले सचिन तेंदुलकर मार्ग पर बनाए गए डंप यार्ड में भी इसी तरह आग लगती रहती थी। अब वही स्थिति केदारपुर लैंडफिल साइट पर बनी हुई है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम से विस्तृत जवाब तलब किया है।

Updated on:
11 May 2026 03:25 pm
Published on:
09 May 2026 07:26 pm