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मेट्रो शहरों को एमपी की चुनौती, सूबे में 20 हजार से ज्यादा करोड़पति, टैक्स चुकाने में मध्यप्रदेश दिखा रहा है दम

कहते हैं कि आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते और जब ये आंकड़े देश के खजाने (आयकर विभाग) से निकले हों, तो तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है। देश की आर्थिक बिसात पर अब तक पिछड़े माने जाने वाले हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश ने एक ऐसी छलांग लगाई है, जिसने महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे औद्योगिक दिग्गजों को हैरान कर दिया है।
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ग्वालियर. कहते हैं कि आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते और जब ये आंकड़े देश के खजाने (आयकर विभाग) से निकले हों, तो तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है। देश की आर्थिक बिसात पर अब तक पिछड़े माने जाने वाले हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश ने एक ऐसी छलांग लगाई है, जिसने महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे औद्योगिक दिग्गजों को हैरान कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के आयकर रिटर्न (आइटीआर) के जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं, वे गवाही दे रहे हैं कि मप्र न केवल टैक्स चुकाने के मामले में जागरूक हो रहा है, बल्कि यहां लखपतियों और करोड़पतियों की एक नई फौज खड़ी हो रही है, जो सीधे तौर पर महानगरों के एकाधिकार को चुनौती दे रही है।

आर्थिक सुस्ती के बीच एमपी की रफ्तार तेज

जहां देश के सबसे बड़े औद्योगिक हब महाराष्ट्र में इस साल टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 0.06 प्रतिशत की गिरावट आई और तमिलनाडु जैसा विकसित राज्य 0.67 प्रतिशत की मंदी झेल रहा है, वहीं मध्यप्रदेश ने 1.79 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर दर्ज की है। इस साल मध्यप्रदेश से रिकॉर्ड 37.74 लाख आयकर रिटर्न दाखिल किए गए हैं, जो पिछले साल के 37 लाख से कहीं आगे हैं। देशभर में दाखिल कुल 9.19 करोड़ रिटर्न में मध्यप्रदेश अकेले करीब 4.10 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। अगर तुलना करें, तो मप्र की यह वृद्धि दर यूपी (0.37 फीसदी), कर्नाटक (0.23 फीसदी), हरियाणा (0.21 फीसदी) और लगभग स्थिर पड़े गुजरात के मुकाबले कहीं अधिक मारक और दमदार है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि राज्य में औपचारिक अर्थव्यवस्था का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।

आंकड़ों का खेल : कहां खड़े हैं हम?

आयकर विभाग के श्रेणी-वार आंकड़ों पर नजर डालें, तो देश में इस बार 50 लाख से 10 करोड़ रुपए तक की आय घोषित करने वाले संपन्न करदाताओं का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। पूरे देश में जहां 9 लाख लोगों ने 50 लाख से 1 करोड़ रुपए की ब्रैकेट में रिटर्न भराए वहीं मध्यप्रदेश में इस श्रेणी में 34,859 लोग शामिल हैं।

उच्च आय वर्ग राज्यवार लेखा-जोखा
राज्य 50 लाख से 1 करोड़ तक 1 करोड़ से 5 करोड़ तक 5 करोड़ से 10 करोड़ तक
मध्यप्रदेश 34,859 18,337 1,693
महाराष्ट्र 1,29,148 67,935 6,273
उत्तर प्रदेश 84,851 44,634 4,121
राजस्थान 56,284 29,607 2,734
तमिलनाडु 52,628 27,684 2,556
कर्नाटक 49,738 26,163 2,416
दिल्ली 41,320 21,736 2,007
हरियाणा 32,478 17,084 1,578
छत्तीसगढ़ 13,008 6,843 632

(नोट : हजारों में राउंड-ऑफ आंकड़ों के अनुसार भी मप्र में 50 लाख-1 करोड़ श्रेणी में 35 हजार, 1-5 करोड़ में 18 हजार और 5-10 करोड़ में लगभग 2 हजार करदाता दर्ज हैं।)

महानगरों के तिलस्म को तोड़ता नया मप्र

अब तक यह माना जाता था कि एक करोड़ या पांच करोड़ से अधिक की आय केवल मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे महानगरों में ही संभव है। लेकिन मध्यप्रदेश के 18,337 करदाताओं ने 1 से 5 करोड़ रुपए की श्रेणी में और 1,693 करदाताओं ने 5 से 10 करोड़ रुपए की श्रेणी में आकर इस मिथक को मटियामेट कर दिया है। यह इस बात का संकेत है कि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहर अब सिर्फ प्रशासनिक या रिहायशी केंद्र नहीं रहे, बल्कि बड़े कमर्शियल हब बन चुके हैं।

एक्सपर्ट व्यू : बदलते मध्यप्रदेश का नया इकोनॉमिक विजन है
मप्र की इस सफलता के पीछे कोई तुक्का नहीं, बल्कि ठोस नीतियां हैं। पिछले कुछ सालों में राज्य में व्यापार सुगमता, सिंगल विंडो सिस्टम और स्टार्टअप संस्कृति को पंख मिले हैं। रियल एस्टेट में आया उछाल, हेल्थकेयर और शिक्षा क्षेत्र का कॉर्पोरेटाइजेशन, आईटी सेक्टर का पैर पसारना और विनिर्माण इकाइयों का सुदूर इलाकों तक पहुंचना इस समृद्धि की मुख्य वजह है। इसके अलावा, कर विभाग की इ-फाइलिंग प्रक्रियाओं के सरलीकरण ने छोटे व्यवसायियों और पेशेवरों को भी खुलकर अपनी सही आय घोषित करने का हौसला दिया है।

सुरभि जैन, सीए