
gas connection
ग्वालियर. सात समंदर पार छिड़ी जंग की तपिश भले ही अब थम चुकी हो, लेकिन ये तपिश अब भी ग्वालियर-चंबल की रसोइयों को परेशान किए हुए है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच के भू-राजनीतिक तनाव ने देश में ऐसा एलपीजी संकट खड़ा किया है कि नए घरेलू गैस कनेक्शनों पर पूरी तरह ‘ब्रेक’ लग गया है।
आलम यह है कि एक तरफ पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम आसमान छू रहे हैं, तो दूसरी तरफ नए और डीबीसी (डबल बॉटल कनेक्शन) के लिए उपभोक्ता सिर्फ मिन्नतें करने को मजबूर हैं। अकेले ग्वालियर में डेढ़ हजार से अधिक आवेदन धूल खा रहे हैं और आवेदक एजेंसियों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। बता दें कि जिले में तीनों प्रमुख कंपनियों के करीब 5.73 लाख ग्राहक हैं, जिन्हें संभालने वाली 40 गैस एजेंसियां फिलहाल असहाय नजर आ रही हैं।
इस पूरे खेल में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से नए कनेक्शन रोकने का कोई लिखित आदेश या सर्कुलर जारी ही नहीं किया गया है। पर्दे के पीछे से खेल करते हुए सीधे पोर्टल पर आवेदन का ङ्क्षलक ही बंद कर दिया गया। जब कोई लिखित गाइडलाइन ही नहीं है, तो एजेंसी संचालक भी उपभोक्ताओं को कोई ठोस वजह नहीं बता पा रहे हैं।
एजेंसियों के ’नो-सिग्नल’ रवैये से आम जनता बेहाल है। सिटी सेंटर के निवासी सत्येंद्र कुमार बताते हैं, कि मुझे नया कनेक्शन लेना था, एक महीने से चक्कर काट रहा हूं। अब मजबूरी में 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर से काम चलाना पड़ रहा है। समझ नहीं आता कि वहां युद्ध भी थम चुका है, फिर यहां नया कनेक्शन देने में क्या परेशानी है?
एलपीजी के नए कनेक्शनों और डीबीसी पर पिछले तीन महीने से अघोषित प्रतिबंध है। लोग आ रहे हैं, लेकिन उन्हें बैरंग लौटाना पड़ रहा है क्योंकि कंपनी ने सॉफ्टवेयर लेवल पर ही रोक लगा रखी है।
श्यामानंद शुक्ला, कॉर्डिनेटर, ग्वालियर-चंबल एलपीजी फेडरेशन
Published on:
27 Jun 2026 05:34 pm
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