
ग्वालियर. मध्य प्रदेश में प्रदूषण के मामले में अक्सर टॉप पर रहने वाले शहर की आबो-हवा को सुधारने के लिए अब और निगरानी सिस्टम लगाए जाएंगे। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस प्रस्ताव को राज्य और केंद्र सरकार को भेजा था। जिसे अब हरी झंडी मिलने के बाद टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। दो चरणों में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट के बाद शहर में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सेंटरों की संख्या 4 से बढकऱ सीधे 8 हो जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वे के बाद शहर के उन सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों को चुना है, जो धूल और धुएं के गुबार से सबसे ज्यादा प्रभावित रहते हैं। करीब 20 लाख रुपए की लागत से इन जगहों पर सिस्टम लगेंगे। कंपू क्षेत्र अस्पताल और भारी ट्रैफिक जोन, हजीरा मनोरंजनालय पार्क औद्योगिक और व्यस्त क्षेत्र, मानसिक आरोग्यशाला के सामने संवेदनशील मेडिकल जोन, नगर निगम क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक-7, मुरार घनी आबादी वाला क्षेत्र
अब तक कंपू, मुरार और हजीरा जैसे बड़े और व्यस्ततम इलाकों में हवा की शुद्धता मापने का कोई स्थायी जरिया नहीं था। इन इलाकों की हवा में कितना जहर घुला है, इसका सटीक आंकड़ा अधिकारियों के पास होता ही नहीं था। अब नए सिस्टम से पल-पल की लाइव मॉनिटरिंग होगी।
ऑनलाइन सेंटर (लाइव ट्रैङ्क्षकग)---------------ऑफलाइन सेंटर (मैन्युअल)---------------नए बनने वाले ऑनलाइन सेंटर
महाराज बाड़ा ---------------------------------------लाल टिपारा------------------------------------कंपू
फूलबाग --------------------------------------------एलएनआईपी----------------------------------हजीरा
डीडी नगर--------------------------------------------ललियापुरा-------------------------------------मानसिक आरोग्यशाला
सिटी सेंटर--------------------------------------------बरई (ग्रामीण क्षेत्र)----------------------------मुरार (निगम ऑफिस-7)
ग्वालियर का एक्यूआइ अक्सर रेड जोन यानी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, जिससे दमा और सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब तक प्रशासन आंकड़ों की कमी का रोना रोता था, लेकिन अब इन 4 नए सेंटरों के चालू होने के बाद शहर के पास 8 ऑनलाइन और 4 ऑफलाइन सेंटर होंगे। साफ है कि अब निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास बहाने बनाने का मौका नहीं होगा। देखना यह है कि इन अत्याधुनिक मशीनों से मिलने वाले आंकड़ों के बाद लापरवाह विभागों और सडक़ों पर धूल उड़ाने वाले ठेकेदारों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।