ग्वालियर

ग्वालियर : अब 8 सेंटरों से निगरानी, 4 एयर मॉनिटरिंग सिस्टम लगेंगे

मध्य प्रदेश में प्रदूषण के मामले में अक्सर टॉप पर रहने वाले शहर की आबो-हवा को सुधारने और निगरानी सिस्टम लगाए जाएंगे। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस प्रस्ताव को राज्य और केंद्र सरकार को भेजा था। जिसे हरी झंडी के बाद टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।

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Jun 10, 2026
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air pollution in gwalior

ग्वालियर. मध्य प्रदेश में प्रदूषण के मामले में अक्सर टॉप पर रहने वाले शहर की आबो-हवा को सुधारने और निगरानी सिस्टम लगाए जाएंगे। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस प्रस्ताव को राज्य और केंद्र सरकार को भेजा था। जिसे हरी झंडी के बाद टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। दो चरणों में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट के बाद शहर में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सेंटरों की संख्या 4 से बढ़कर सीधे 8 हो जाएगी। इन 4 नए ब्लैक स्पॉट्स पर होगी नजर: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वे के बाद शहर के उन सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों को चुना है जहां 20 लाख रुपए की लागत से सिस्टम लगेंगे। कंपू क्षेत्र अस्पताल और भारी ट्रैफिक जोन, हजीरा मनोरंजनालय पार्क औद्योगिक और व्यस्त क्षेत्र, मानसिक आरोग्यशाला के सामने संवेदनशील मेडिकल जोन, नगर निगम क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक-7, मुरार घनी आबादी वाला क्षेत्र शामिल हैं।

क्यों जरूरी था यह विस्तार…

अब तक कंपू, मुरार और हजीरा जैसे बड़े और व्यस्ततम इलाकों में हवा की शुद्धता मापने का कोई स्थायी जरिया नहीं था। इन इलाकों की हवा में कितना जहर घुला है, इसका सटीक आंकड़ा अधिकारियों के पास होता ही नहीं था। अब नए सिस्टम से पल-पल की लाइव मॉनिटरिंग होगी।

अब बहानेबाजी नहीं, सीधे एक्शन की उम्मीद

ग्वालियर का एक्यूआइ अक्सर रेड जोन यानी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, जिससे दमा और सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब तक प्रशासन आंकड़ों की कमी का रोना रोता था, लेकिन अब इन 4 नए सेंटरों के चालू होने के बाद शहर के पास 8 ऑनलाइन और 4 ऑफलाइन सेंटर होंगे। साफ है कि अब निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास बहाने बनाने का मौका नहीं होगा। देखना यह है कि इन अत्याधुनिक मशीनों से मिलने वाले आंकड़ों के बाद लापरवाह विभागों और सड़कों पर धूल उड़ाने वाले ठेकेदारों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, मौसम का एक्स-रे भी करेगा यह सिस्टम

पीएम 2.5 और पीएम 10: धूल, वाहनों के धुएं और कचरा जलने से निकलने वाले वो सूक्ष्म कण जो सांस के जरिए शरीर में फेफड़ों को छलनी कर देते हैं।
जहरीली गैसें: हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन के स्तर को मापेगा।
मौसम का हाल: इसके साथ ही हवा की गति, दिशा, तापमान, नमी, वायुदाब और बारिश की संभावना का सटीक वैज्ञानिक डेटा भी दर्ज करेगा।

ग्वालियर का प्रदूषण कुंडली नेटवर्क:
अब कहाँ, क्या स्थिति है
ऑनलाइन सेंटर ऑफलाइन सेंटर नए बनने वाले
(लाइव ट्रेकिंग) (मैन्युअल) ऑनलाइन सेंटर
महाराज बाड़ा लाल टिपारा कंपू
फूलबाग एलएनआइपी हजीरा
डीडी नगर ललियापुरा मानसिक आरोग्यशाला
सिटी सेंटर बरई (ग्रामीण क्षेत्र) मुरार (निगम ऑफिस-7)

Published on:
10 Jun 2026 06:16 pm