ग्वालियर

46 जिलों में फर्जी सिम का ‘डार्क ट्रेप’, तीन-चार साल पुराने 1437 नंबरों से अंजाम दी गईं 1907 साइबर ठगी

देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड और उसके पीछे सक्रिय फर्जी सिम के नेटवर्क पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) ने मध्यप्रदेश के 46 जिलों में ऐसे 1437 संदिग्ध सिम नंबरों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल कुल 1907 साइबर फ्रॉड की वारदातों में किया गया है।
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Sep 04, 2026
साइबर फ्रॉड
साइबर फ्रॉड

ग्वालियर. देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड और उसके पीछे सक्रिय फर्जी सिम के नेटवर्क पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) ने मध्यप्रदेश के 46 जिलों में ऐसे 1437 संदिग्ध सिम नंबरों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल कुल 1907 साइबर फ्रॉड की वारदातों में किया गया है। इन नंबरों को बाजार में खपाने वाले 504 सिम वेंडर्स (विक्रेताओं) को भी चिह्नित किया है। हालांकि, इन वेंडर्स तक पहुंचना और पुराने मामलों की तह तक जाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि ये सभी संदिग्ध सिम तीन से चार साल पुरानी हैं।

टेलीकॉम कंपनियों के पास डेटा नहीं
साइबर पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, एनसीआरपी पोर्टल पर रडार में आए ये नंबर 3 से 4 साल पहले जारी किए गए थे। साइबर ठगों ने इन सिम का इस्तेमाल एक या दो वारदातों में ओटीपी हासिल करने के लिए किया और फिर इन्हें फेंक दिया या बंद कर दिया। इस बीच टेलीकॉम कंपनियों ने वे नंबर रिसाइकिल कर दूसरे नए ग्राहकों को जारी कर दिए हैं। अब जब पुलिस उन पुराने मामलों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड मांग रही है, तो टेलीकॉम कंपनियों ने पुराना डेटा न होने का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं।

छतरी लगाकर सिम बेचने वाले गायब
जांच में यह भी सामने आया है कि चिन्हित किए 504 वेंडर्स में कई ऐसे फेरीवाले और छोटे दुकानदार शामिल हैं, जो सड़कों के किनारे छतरी लगाकर सिम बेचते थे। अब वे गायब हो चुके हैं। जिन लोगों के नाम पर ये सिम इश्यू की गई थीं, उन्हें तो यह तक नहीं पता कि उनके दस्तावेजों का गलत उपयोग हुआ। पीड़ितों का कहना है कि सिम पोर्ट कराने या नई सिम लेने के नाम पर उन वेंडर्स ने उनके आधार कार्ड, फोटो और अंगूठे के निशान तो ले लिए, लेकिन नाम से कई और फर्जी सिम एक्टिवेट कर ठगों को बेच दी गईं।

कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म से पहचान की जा रही
पुराने सीडीआर न मिलने के बावजूद साइबर सेल ने आरोपियों तक पहुंचने का दूसरा रास्ता ढूंढ निकाला है। पुलिस अब कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) के जरिए उन वेंडर्स की कुंडली खंगाल रही है, जिन्होंने ये फर्जी सिम एक्टिवेट की थीं। इन वेंडर्स की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
जांच की जा रही है
साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हो रही फर्जी सिम के नेटवर्क को तोड़ने के लिए वेंडर-वार जांच की जा रही है। टेलीकॉम कंपनियों से 3-4 साल पुरानी सीडीआर मिलने में अड़चनें आ रही हैं। सीएएफ (सीएएफ) फॉर्म के आधार पर वेंडर्स को चिह्नित कर कार्रवाई कर रहे हैं।
—संजीव नयन शर्मा, डीएसपी, स्टेट साइबर सेल, ग्वालियर

Updated on:
04 Sept 2026 06:10 pm
Published on:
04 Sept 2026 06:01 pm