
ग्वालियर। शहर में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कभी बैंककर्मी बनकर तो कभी क्रेडिट कार्ड की फीस माफ कराने का झांसा देकर ठग लोगों के खातों से रकम निकाल रहे हैं। इतना ही नहीं, ऑनलाइन हेल्पलाइन नंबर तलाशना भी लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है। ग्वालियर में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में साइबर ठगों ने करीब 2 लाख 72 हजार रुपए की ठगी कर ली। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मामलों की जांच शुरू कर दी है।
रामनगर लूटपुरा, चार शहर का नाका निवासी उपेंद्र सिंह सिकरवार (38) ने पुलिस को शिकायत में बताया कि 19 सितंबर को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को बैंककर्मी बताते हुए कहा कि उनके खाते से ट्रांजैक्शन किया गया है। उपेंद्र ने जब किसी भी तरह का लेनदेन करने से इनकार किया तो ठग ने बातचीत जारी रखी और उन्हें काफी देर तक अपनी बातों में उलझाए रखा।
कुछ समय बाद उपेंद्र को पता चला कि उनके बैंक खाते से 1 लाख 85 हजार 999 रुपए निकाल लिए गए हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
लक्ष्मीविहार कॉलोनी निवासी मनीष रस्तोगी (50) के साथ ठगी में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया गया। मनीष ने एसबीआइ का टाइटन क्रेडिट कार्ड लिया था। पिछले महीने उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एसबीआइ क्रेडिट कार्ड का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके कार्ड की 3,300 रुपए सालाना फीस माफ की जा रही है।
ठग ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए मोबाइल चालू रखने को कहा। मनीष उसकी बातों में आ गए। 25 अगस्त को क्रेडिट कार्ड का बिल आया तो उन्हें ठगी का पता चला। बिल में दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 46,460 रुपए निकाले जाने की जानकारी सामने आई।
भैरों कॉलोनी, हुरावली निवासी सुरेंद्र सिंह जाटव के खाते से 699 रुपए ऑटो पे के जरिए कट रहे थे। इसे बंद कराने के लिए उन्होंने गूगल पर हेल्पलाइन नंबर तलाशा। उन्हें जो नंबर मिला, उस पर संपर्क करने के बाद सामने वाले ने खुद को हेल्पलाइन कर्मचारी बताया।
ठग ने समस्या का समाधान करने के नाम पर सुरेंद्र से एक ऐप इंस्टॉल कराया। इसके बाद उनके खाते से 39,988 रुपए ट्रांसफर कर लिए गए। रकम निकलने के बाद सुरेंद्र को ठगी का पता चला और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार बैंक, क्रेडिट कार्ड या किसी सेवा की समस्या के समाधान के नाम पर अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। किसी भी बैंक या कंपनी की हेल्पलाइन के लिए संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर उपलब्ध नंबर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। खाते से संबंधित ओटीपी, पिन, सीवीवी या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।