ग्वालियर

ई-कॉमर्स से तमंचा-पिस्टल डिलीवरी, ग्वालियर-चंबल बन रहा ‘गन हब’

ग्वालियर. अंचल में अवैध हथियारों का कारोबार अब नए दौर में पहुंच गया है। देसी तमंचे और पिस्टल अब पारंपरिक नेटवर्क से नहीं, बल्कि ई-कॉमर्स जैसे मॉडल पर बिक रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर इंस्टाग्राम पर हथियारों की बुकिंग हो रही है और ऑनलाइन पेमेंट के बाद पैडलर्स के जरिए घर तक डिलीवरी दी […]

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Apr 11, 2026
अवैध हथियार

ग्वालियर. अंचल में अवैध हथियारों का कारोबार अब नए दौर में पहुंच गया है। देसी तमंचे और पिस्टल अब पारंपरिक नेटवर्क से नहीं, बल्कि ई-कॉमर्स जैसे मॉडल पर बिक रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर इंस्टाग्राम पर हथियारों की बुकिंग हो रही है और ऑनलाइन पेमेंट के बाद पैडलर्स के जरिए घर तक डिलीवरी दी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र तेजी से 'गन हब' में तब्दील हो रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में जिले में लाइसेंसी शस्त्रधारकों की संख्या 35 हजार के पार है, लेकिन अवैध हथियारों का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। पुलिस की कार्रवाई में सामने आया है कि हर महीने करीब 150 से 200 देसी तमंचे और पिस्टल तस्करी के जरिए अंचल में खपाए जा रहे हैं।

मुनाफा बढ़ा रहा धंधा, युवाओं में क्रेज

इस अवैध कारोबार में मोटा मुनाफा इसकी सबसे बड़ी वजह है। सिकलीगरों के ठिकानों पर तमंचा 4-6 हजार और पिस्टल 10-12 हजार में तैयार होती है, जो ग्राहकों को 10 हजार से 40 हजार रुपए तक में बेची जाती है। कुछ राज्यों में इनकी कीमत 50 हजार रुपए तक पहुंच रही है। पुलिस के अनुसार, युवाओं में हथियारों से 'हनक' दिखाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जिससे इस बाजार को मजबूती मिल रही है।

35 दिन में 18 फायरिंग, शहर में ज्यादा वारदातें…

पिछले 35 दिनों में शहर और देहात में 18 फायरिंग की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें 14 मामले पुरानी रंजिश से जुड़े हैं। पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर 8 पिस्टल और 15 कारतूस जब्त किए हैं। अपराधों का ग्राफ शहर में ज्यादा है—14 घटनाएं शहर में और 4 देहात में दर्ज हुईं। बहोड़ापुर में सबसे ज्यादा 4 और महाराजपुरा में 2 मामले सामने आए।

इंस्टाग्राम पर सौदे, ऑनलाइन पेमेंट

खरगोन और बड़वानी में सक्रिय देसी कारखानों में बने हथियार सोशल मीडिया पर प्रदर्शित किए जा रहे हैं। खरीदार और सप्लायर के बीच बातचीत भी इंस्टाग्राम पर ही होती है। सौदा तय होने के बाद रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की जाती है, फिर डिलीवरी का समय और स्थान तय कर पैडलर्स के जरिए हथियार पहुंचाए जाते हैं। तस्करों के मुताबिक, पुराने ग्राहकों को उधारी की सुविधा मिलती है, जबकि नए ग्राहकों से एडवांस लिया जाता है।

पुलिस की कार्रवाई, लेकिन मास्टरमाइंड बाहर

पिछले तीन महीनों में पुलिस ने तीन बड़े मामलों का खुलासा कर 4 तस्करों को पकड़ा और 6 पिस्टल व 2 तमंचे बरामद किए। पूछताछ में सामने आया कि खंडवा, खरगोन और बड़वानी के नेटवर्क से हथियार अंचल में सप्लाई हो रहे हैं। हालांकि, पुलिस अब तक सिर्फ पैडलर्स तक ही पहुंच पाई है, जबकि इस काले कारोबार के बड़े संचालक अब भी पकड़ से बाहर हैं।

एक्सपर्ट व्यू
दीपक भार्गव रिटायर्ड सीएसपी कारतूस पर लगाम कसो, धंधा बंद होगा

खंडवा और खरगोन से अंचल में देसी हथियारों की सप्लाई का रुट बरसों पुराना है। ग्वालियर चंबल के अपराधों में ज्यादातर अपराधी इन हथियारों का इस्तेमाल करते रहे हैं। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिन्हें शस्त्र लाइसेंस नहीं मिला उन लोगों ने भी हनक जमाने के लिए देसी हथियारों का सौदा किया है। रंगबाजी जमाने के लिए युवाओं ने इस बाजार को दम दी है। इस धंधे पर लगाम कसने के लिए पुलिस हथियार सप्लायर्स के एजेंट को लगातार रडार पर लेती रही है। देसी हथियारों के धंधे को पूरी तरह खत्म करने के लिए इनमें इस्तेमाल होने वाले कारतूसों का दो नंबरी कारोबार बंद करना होगा।

Updated on:
11 Apr 2026 05:59 pm
Published on:
11 Apr 2026 05:58 pm
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