
Gwalior Crime News: ग्वालियर में सौतेली बेटी की हत्या कर उसकी लाश को चंबल नदी में फेंकने और सात दिन तक पुलिस को अपनी झूठी कहानियों से गुमराह करने वाले बेरहम पिता राजेश कुमार (42) ने आखिरकार सिरोल पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। कलयुगी पिता ने अपनी 11 वर्षीय सौतेली बेटी रीमा (परिवर्तित नाम) की हत्या करने के बाद जुर्म को छिपाने की जो खौफनाक प्लानिंग राजेश कुमार की थी, उसे सुनकर पुलिस अधिकारियों का भी माथा चकरा गया। हत्यारे के मुंह से सच उगलवाने में पुलिस टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
आरोपी राजेश जाटव निवासी हरदौल गार्डन, सिरोल ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि रीमा उसकी सौतेली बेटी थी, इसलिए वह उससे शुरू से नफरत करता था। इसके साथ ही रीमा का अपने हमउम्र पड़ोसी से बात करना और मोबाइल चलाना उसे बिल्कुल पसंद नहीं था। घटना से तीन दिन पहले उसकी पत्नी ने रीमा के मोबाइल पर पड़ोसी का मैसेज देख लिया था, जिसके बाद राजेश ने रीमा को रास्ते से हटाने का मन बना लिया था। वारदात वाले दिन राजेश ने रीमा को सब्जी काटने को कहा, लेकिन जब उसने रीमा को दोबारा मोबाइल चलाते देखा, तो उसका खून खौल उठा। उसने पत्नी और दूसरी बेटियों को कमरे से बाहर निकाला और चूल्हे की जली हुई लकड़ी से रीमा को बुरी तरह पीटा, फिर गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
एएसपी अनु बेनीवाल ने बताया कि आरोपी अपनी ही गढ़ी हुई कहानियों में फंस गया। राजेश ने पुलिस को बताया था कि रीमा ने कुर्सी पर बिस्तर रखकर छत के कुंदे से लटककर फांसी लगाई थी। शक होने पर जब पुलिस ने घटनास्थल पर सीन री-क्रिएट कराया और एक महिला पुलिसकर्मी को उसी तरह खड़ा किया, तो उसके हाथ कुंदे तक नहीं पहुंचे। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज में राजेश आधी रात को गाड़ी लेकर जाता और अगले दिन लौटता दिखा, जिसमें पत्नी और दूसरी बेटियां तो थीं लेकिन मृतका नहीं थी। इन सवालों का जब राजेश जवाब नहीं दे पाया, तो वह टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया।
पकड़े जाने के डर से शातिर राजेश ने शव को पत्नी की साड़ी से छत के कुंदे पर लटका दिया और घरवालों को यह यकीन दिलाया कि रीमा ने खुदकुशी की है। इसके बाद वह शव को गाड़ी में डालकर भिंड ले गया और वहां चंबल नदी में फेंक दिया। जिस साड़ी से फंदा बनाया था, उसे भी पत्थरों से बांधकर नदी में बहा दिया। आरोपी का सोचना था कि चंबल के मगरमच्छ शव को खा जाएंगे तो सबूत हमेशा के लिए मिट जाएगा और पुलिस ढूंढती ही रह जाएगी। अगले दिन उसने थाने पहुंचकर बेटी के अपहरण की झूठी शिकायत दर्ज करा दी।