फूटी कॉलोनी: हमने गहने बेचकर जमीन खरीदी है, जान ले लेेंगे या दे देंगे, नहीं तोडऩे देंगे अपने मकान
ग्वालियर। साहब, हमने अपने सोने-चांदी के जेवर बेचकर जमीन खरीदी है, कैसे तोडऩे दें अपने मकान। हम मर जाएंगे या जान ले लेंगे, मकान नहीं टूटने देंगे। यह कहना था फूटी कॉलोनी में रहने वाली रामसखी एवं एक दर्जन से अधिक उन महिलाओं का, जो मकान तोडऩे के दौरान सुशीला को मृत बताकर सडक़ पर रखकर उसे घेरे हुए बैठी थीं।
यह है मामला
सिरोल थानांतर्गत फूटी कॉलोनी स्थित शासकीय भूमि पर शासन द्वारा बाल जेल बनने का प्रस्ताव है। भूमि पर डेढ़ दशक पूर्व भू-माफियाओं ने कब्जा कर दस से पच्चीस हजार रुपए वर्ग फीट में बेच दी। यहां के अधिकतर लोगों के पास केवल नोटरी है। यहां लगभग छह सौ से अधिक मकान बने हुए हैं, जिनमें हाल ही में प्रशासन की ओर से 82 लोगों को नोटिस दिए गए हैं। इनमें कई मकान सडक़ के काफी नजदीक हैं।
हाईकोर्ट का है यह आदेश
हाईकोर्ट ने विगत दिवस फूटी कॉलोनी की जमीन साफ न कराने के बाद एक अवमानना याचिका की सुनवाई कर तत्काल वहां से अतिक्रमण हटाने को कहा है, जिसका पालन करने के लिए सोमवार को दोपहर एक बजे एसडीएम दिनेश शुक्ला पुलिस अधिकारियों के साथ वहां पहुंचे। टीम वहां केवल पांच मकान तोड़ पाई थी, तभी चार महिलाओं की मौत होने की अफवाह फैल गई। तोडफ़ोड़ करने आई टीम को इसका हवाला देकर लोगों ने यह कहकर वापस कर दिया कि हम स्वयं अपना अतिक्रमण हटा लेंगे, इसके बाद टीम वापस लौट गई।
इधर लाठियां, उधर से पथराव
नेताओं से झड़प होने के बाद पुलिस ने लोगों पर लाठियां बरसाईं, तो लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई। लगभग पांच घंटे वहां हंगामा हुआ और दहशत बनी रही।
युवकों को पकड़ कर पीटा
पथराव से गुस्साई पुलिस ने फूटी कॉलोनी की हर गली में दस्तक दी और कई घरों के दरवाजे बजाए, और वहां बैठे युवकों को पकडकऱ पीटा। पुलिस ने लगभग एक दर्जन युवाओं को दबोचा।
महिला पर चले पुलिस के डंडे
फूटी कॉलोनी में सर्चिंग के दौरान एक घर से दो युवकों को पुलिस ले जाने लगी तो महिला बीच में आ गई और बेटों को नहीं ले जाने पर अड़ गई। यह देख पुलिसकर्मियों ने जमकर डंडे बरसाए, महिला पिटती रही, लेकिन उसने बेटों को नहीं छोड़ा, न ही पुलिस को ले जाने दिया।
250 लोगों पर मामला दर्ज
एडिशनल एसपी ईस्ट अमन सिंह राठौर के अनुसार उपद्रव व पथराव की घटना के मामले में 200-250 लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा, बलवा आदि की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया है।
मृत बनकर लेटी महिला भी भागी : मकान न टूटें, इसके लिए कॉलोनी की महिलाएं सुशीला बाई को मृत एवं चार अन्य को अचेत होने की कहकर बैठ गईं थीं। पुलिस ने जब लाठियां बरसाईं तो भगदड़ मच गई। जिस महिला को मृत बताया जा रहा था, वह उठकर भाग निकलीं।
टीआइ और आप नेत्री में तीखी झड़प
मौके पर आप नेत्री मनीक्षा तोमर से थाना प्रभारी आलोक परिहार मृत बताई जाने वाली महिला को पानी पिलाने की कह रहे थे, जिस पर महिलाओं से उनकी झड़प हो गई। महिला को एंबुलेंस से ले जाने का आप नेताओं ने विरोध किया, जिसको लेकर सिरोल थाना प्रभारी रमेश डांडे और मनीक्षा में तीखी झड़प हो गई।
नहीं पहुंचे भाजपा नेता
कांग्रेस के आधा दर्जन से अधिक नेता, माकपा और आम आदमी पार्टी के नेता वहां पहुंचे। मुन्नालाल गोयल ने जिला प्रशासन को खबर दे दी कि एक महिला कार्रवाई के दौरान मर गई है, वरिष्ठ अधिकारी को भेजा जाए। इस पर लोग भडक़ गए और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
चला निगम का हथौड़ा : देर शाम एडीएम के निर्देश पर मदाखलत अधिकारी महेन्द्र शर्मा टीम के साथ वहां पहुंचे और जेसीबी चलवाकर तुड़वाया।
प्रशासन जिम्मेदार: शहर जिला कांग्रेस ने घटनाक्रम के लिए प्रशासन को जिम्मेदार माना है। जिलाध्यक्ष डॉ देवेन्द्र शर्मा, विधायक इमरती देवी, मुन्नालाल गोयल, आनंद शर्मा ने कलेक्टर से पुनर्वास की मांग की। मुन्नालाल गोयल ने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया।