
ग्वालियर। भारत रत्न और तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम 5.05 बजे दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। वह दो महीने से एम्स में भर्ती थे। लेकिन,पिछले 36 घंटों के दौरान उनकी सेहत बिगड़ती चली गई। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। इससे पहले भी वह 9 साल से बीमार थे। जिसके चलते वह घर में ही कैद रहते थे। उनके निधन की सूचना जैसे ही लोगों को मिली। सभी एक दम से स्तंभ रह गए। उनके निधन की खबर जैसे ही ग्वालियर के लोगों को मिली सभी के घर पर मायूसी छा गई।
हम आपको उनसे जुड़ी कुछ यादों के बारे में बता रहे हैं। ग्वलियर व्यापार मेले का शताब्दी वर्ष समापन समारोह 14 फरवरी 2005 को आयोजित किया गया था। उस समय के मेला अध्यक्ष राज चड्ढा ने बताया कि जब अटल जी मेले का समापन करने आए तो सबसे पहले उन्होंने मेले का भ्रमण किया। कार में बैठे-बैठे उन्होंने शताब्दी समारोह के लिए लगाए गए स्टॉल्स् का अवलोकन किया।
सबसे पहले वे ऑटो मोबाइल सेक्टर गए, तत्पश्चात उनका काफिला 13 नंबर छत्री पर की ओर बढ़ा,जहां उन्होंने हरिद्वार मिष्ठान भंडार पर स्वल्पाहर करना था, पर वे यहां नहीं उतरे। वे यहां बने श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया उद्यान स्थित जगमगाते शताब्दी स्तंभ को देखने पहुंचे। अटलजी इस स्तंभ तक पैदल ही गए।
जब उन्होंने मुझसे स्तंभ की विशेषता पूछी तो मैंने बताया कि इसमें सौ साल का इतिहास समाया हुआ है। इसे मूर्तिकार मदन मोहन भटनागर ने बनाया है। इतना सुनते ही अटल जी ने स्तंभ का पूरा चक्कर लगाया और कहा - वाह! क्या कमाल का शताब्दी स्तंभ बनाया है। सुंदर! अति सुंदर!! कार्यक्रम के दौरान अटल जी को तीन किलो चांदी और तीन किलो सोने से तैयार किया गया अमृत कलश भेंट किया गया था।
वहीं इस कार्यक्रम में आमंत्रित करने के लिए जब मैं अटल जी से मिलने दिल्ली गया था तो उन्होंने कहा था कि मैं वहां जरूर आउंगा,लेकिन वहां के शौचालय इतने खराब हैं कि मैं वहां से बाहर भी आ पाउंगा या नहीं। तब मैंने उन्हें बताया कि सभी शौचालय बना दिए हैं। यही बात उन्होंने मेले में मंच पर कार्यक्रम के दौरान भी कही थी और मेरे लिए कहा था कि देखन में छोटे लगें,घाव करें गंभीर।