
ग्वालियर। नए और पुराने दोस्तों से मिलवाने वाला गूगल अब बिछड़ों को उनके परिवार वालों से मिलवाने में भी काफी मददगार साबित हो रहा है। शहर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें छह साल पहले अपनों से बिछड़ी एक महिला गूगल की मदद से अपनों को मिल गई है। महिला राजेश्वरी पटेल (35) छह साल तक अपने ही शहर में लावारिसों की तरह भटकती रहीं,परिजन उन्हें खोज नहीं सके।
पहले सिर में चोट लगने पर जेएएच के न्यूरोलॉजी में उनका इलाज चला। ठीक होने पर उन्हें आश्रय स्वर्ग सदन में रखा गया। यहां करीब दो माह बाद उन्होंने मुडि़या देहरा बीना,जिला सागर की जानकारी दी और अपने पिता,मां और भाई के नाम बताए। इसके बाद केअर एण्ड अवेयर फाउंडेशन के सदस्य पवन सूर्यवंशी ने गूगल पर उनका गांव सर्च किया।
जानकारी मिलने पर राजेश्वरी के पिता भैरव सिंह से बात हुई, तो पता चला कि राजेश्वरी के पति और बच्चे ग्वालियर में ही रहते हैं। पिता भैरव सिंह ग्वालियर आए और राजेश्वरी के पति, बेटा, बेटियों को लेकर आश्रय स्वर्ग सदन पहुंचे। यहां अपनी मां को देखकर बच्चे और अन्य परिजन लिपट-लिपट कर रोने लगे। पति रामनरेश पटेल राजेश्वरी को देखकर बोले-हमने तो सोच लिया था कि अब यह इस दुनिया में नहीं हैं। इनका मिलना हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं हैं।
अज्ञात मरीज के रूप में हुई थीं भर्ती
11 जुलाई को जेएएच के न्यूरोलॉजी सहायक अधीक्षक डॉ. विनीत चतुर्वेदी ने अज्ञात भर्ती महिला राजेश्वरी की जानकारी केअर एण्ड अवेयर फाउंडेशन के विकास गोस्वामी को दी थी। राजेश्वरी को सिर में चोट लग जाने से कोई यहां एडमिट करा गया था। विकास ने इलाज में मदद के साथ, ठीक होने के बाद राजेश्वरी को आश्रय स्वर्ग सदन में रखकर देखभाल की। इसके अलावा सदस्य जूली अनेजा,अनुभा,सादिया परवीन, मीना द्वारा करीब 2 माह तक राजेश्वरी की देखभाल की गई।
घर से निकल गई थीं
पति रामनरेश ने बताया कि राजेश्वरी मानसिक रूप से बीमार थीं और उनका इलाज चल रहा था। छह साल पहले चंदननगर कोटेश्वर ग्वालियर स्थित घर से निकल गई थीं।हमने इन्हें काफी खोजा,लेकिन नहीं मिलीं, इसके बाद थाना किलागेट में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।