
ग्वालियर। सितंबर माह के लिए दाखिल किए जाने वाले जीएसटीआर-3 बी रिटर्न अब करदाता 25 अक्टूबर तक दाखिल कर सकेंगे। जीएसटी विभाग ने रविवार को नोटिफिकेशन जारी कर इसकी अंतिम तिथि 20 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 अक्टूबर कर दी है। चूंकि शनिवार को जीएसटी पोर्टल नहीं चलने के कारण करदाता रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए थे, इसके चलते विभाग ने इसकी तारीख को बढ़ा दिया है।
जिन करदाताओं की माल खरीदी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट 1 जुलाई 2017 से 31 मार्च 2018 की रह गयी थी उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने का आखरी मौका 20 अक्टूबर तक दिया गया था लेकिन इस दिन पोर्टल के नहीं चलने के कारण हजारों व्यापारी रिटर्न दाखिल करने से वंचित रह गए थे तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा भी नहीं कर पाए थे।
इन व्यापारियों की सुविधा को देखते हुए तारीख को बढ़ा दिया गया है। अब व्यापारी जुलाई से मार्च तक की आइटीआर को इनपुट टैक्स क्रेडिट को 25 अक्टूबर तक क्लेम कर सकेंगे।
यदि किसी माह के जीएसटीआर-3बी जमा करते समय इनपुट टैक्स क्रेडिट अधिक या गलत ले ली गई हो तो उसे रिवर्स करना पड़ेगा। गलत इनपुट क्रेडिट के रिवर्स के समय 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह का ब्याज भी लगाया जाना है।
जीएसटी सभी व्यवसायों पर लागू होगा
व्यवसायों में शामिल हैं – व्यापार, वाणिज्य, निर्माण, पेशे, व्यवसाय या किसी अन्य समान कार्यवाही, इसकी पसार या प्रायिकता के बावजूद। इसमें व्यवसाय शुरू करने या बंद करने के लिए माल / सेवाओं की आपूर्ति भी शामिल है।
सेवाओं का मतलब वस्तु के अलावा कुछ भी है | यह संभावना है कि सेवाएं और सामान एक अलग जीएसटी दर होगी।
जीएसटी सभी व्यक्तियों पर लागू होगा |
व्यक्तियों में शामिल हैं – व्यक्तियों, एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) , कंपनी, फर्म, एलएलपी (सीमित दायित्व भागीदारी), एओपी, सहकारी सोसायटी, सोसाइटी, ट्रस्ट आदि। हालांकि, जीएसटी कृषक विशेषज्ञों पर लागू नहीं होगी।
कृषि में फूलों की खेती, बागवानी, रेशम उत्पादन, फसलों, घास या बगीचे के उत्पादन शामिल हैं। लेकिन डेयरी फार्मिंग (दूध का व्यापार), मुर्गी पालन, स्टॉक प्रजनन (पशु-अभिजननक्षेत्र), फल या संगमरमर या पौधों के पालन में शामिल नहीं है।
जीएसटी पंजीकरण की आवश्यकता कब होगी
जीएसटी पंजीकरण प्राप्त करने के लिए पैन अनिवार्य है। हालांकि, अनिवासी व्यक्ति सरकार द्वारा अनिवार्य अन्य दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण प्राप्त कर सकता है
एक पंजीकरण प्रत्येक राज्य के लिए आवश्यक होगा। करदाता राज्य में अपने अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल (व्यापार ऊर्ध्वाधर) के लिए अलग-अलग पंजीयन प्राप्त कर सकते हैं।