
एक कॉल बना सहारा
ग्वालियर. कभी करियर को लेकर भविष्य का डर, कभी पारिवारिक रिश्तों में कड़वाहट, तो कभी ऐसे नकारात्मक विचार, जिन्हें अपनों से साझा करने में भी झिझक महसूस होती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग मानसिक द्वंद्व से जूझ रहे हैं। इलाज की इच्छा के बावजूद सामाजिक तानों और अस्पताल जाने की झिझक के कारण वे परेशानी छिपाते रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन उम्मीद की किरण बनी है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर की मानसिक आरोग्यशाला और इंदौर के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में संचालित केंद्रों पर हर महीने औसतन 9 हजार कॉल आ रहे हैं। अकेले ग्वालियर सेंटर पर करीब 4,500 लोग हर माह परामर्श ले रहे हैं। वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश में 2.50 लाख से अधिक लोग हेल्पलाइन से परामर्श ले चुके हैं।
रेड फ्लैग मॉनिटरिंग
आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार व्यक्त करने वाले कॉल को तत्काल रेड फ्लैग कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे लोगों की केस फाइल बनाकर नियमित फॉलोअप किया जाता है और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
केस 1 : पारिवारिक तनाव में खोया रास्ता, फिर मिली उम्मीद…
अंचल के एक युवक के घर में संपत्ति और रिश्तों को लेकर विवाद हुआ, जिससे वह अवसाद में चला गया। नींद उड़ गई और समझ नहीं आ रहा था कि किससे बात करे। उसने टेली-मानस पर संपर्क किया। काउंसलर ने दो सत्रों में उसकी बात सुनी, तनाव प्रबंधन के तरीके बताए और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का हौसला दिया।
केस 2: करियर और शादी के दोहरे दबाव में फंसी युवती…
एक शिक्षित युवती प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी, लेकिन घर से शादी और करियर को लेकर लगातार दबाव था। घबराहट और एंग्जाइटी बढ़ने पर उसने हेल्पलाइन पर कॉल किया। विशेषज्ञ ने उसकी काउंसलिंग की और आमने-सामने चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया। अब उसकी स्थिति में सुधार है।
यहां कॉल कर ले सकते हैं मदद
टोल फ्री नंबर 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल कर विशेषज्ञ से बात कर सकते हैं।
एक्सपर्ट ओपिनियन: फोन पर राहत, गंभीर मामलों में ओपीडी जरूरी
टेली-मानस के प्रचार से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों की झिझक तेजी से टूटी है। घर बैठे शुरुआती परामर्श मिलने से समस्या समझने में मदद मिलती है। हालांकि, हर मानसिक बीमारी का पूरा इलाज फोन पर संभव नहीं है। कुछ मामलों में जांच, थेरेपी और दवाओं की जरूरत होती है, जिसके लिए मरीज को अस्पताल आने की सलाह दी जाती है।
डॉ. अमन किशोर, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर
Updated on:
22 Oct 2026, 5:46 PM IST
Published on:
22 Oct 2026, 5:45 PM IST
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