
Gwalior News :मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब यहां भारतीय सेना के एक जवान ने अपनी ही सर्विस राइफल से आत्मघाती कदम उठाते हुए आत्महत्या कर ली। अबतक की जांच में हुए खुलासे के अनुसार, सिपाही ने राइफल की नाल को अपने पेट और सीने के बीच सटाकर ट्रिगर दबा दिया। राइफल 'बर्स्ट मोड' (ऑटोमैटिक) पर होने के कारण एक के बाद एक कुल 6 गोलियां जवान के जिस्म को चीरती हुई पार निकल गईं। जब तक साथी जवान मौके पर पहुंचे, तब तक खून से लथपथ सिपाही दम तोड़ चुका था। मिलिट्री इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस मामले की कड़ियों को सुलझाने में जुट गई है।
महाराजपुरा थाना पुलिस के अनुसार, मूल रूप से भिंड के रहने वाले 41 वर्षीय इसेंद्र सिंह भदौरिया यूनिट 300 डीएससी प्लाटून में सिपाही (जीडी) के पद पर तैनात थे। शनिवार सुबह उनकी ड्यूटी पोस्ट 25 एमएमपीयू पर गार्ड के रूप में लगी थी। सुरक्षा पोस्ट पर कुल 5 जवानों की मुस्तैदी थी। तीन-तीन घंटे की शिफ्ट होने के कारण बाकी के साथी जवान पास ही बने रेस्ट रूम में आराम कर रहे थे। ड्यूटी शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही अचानक अंधाधुंध गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा कैंपस गूंज उठा। साथी जवान जब तक बदहवास हालत में रेस्ट रूम से दौड़कर पोस्ट पर पहुंचे, इसेंद्र खून में लथपथ जमीन पर पड़े थे। सेना के अधिकारी उन्हें तत्काल मिलिट्री हॉस्पिटल (एमएच) मुरार लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एयरफोर्स स्टेशन के सूबेदार चितरंजन महंता की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम किया है।
जांच में सामने आया है कि जिस आधिकारिक राइफल नंबर 103 (7.62 एसएलआर) से गोली चली, वह 'बर्स्ट मोड' पर सेट थी। ट्रिगर दबते ही पलक झपकते ही 6 राउंड फायर हुए। गोलियां पेट और सीने को चीरती हुई पीठ के रास्ते बाहर निकल गईं, जिससे जवान को संभलने या बचाने का कोई मौका नहीं मिल सका।
पुलिस की प्रारंभिक मिलिट्री इंटेलिजेंस और पारिवारिक पूछताछ में एक दुखद पहलू सामने आया है। सिपाही इसेंद्र सिंह पिछले कुछ समय से गहरे मानसिक अवसाद में थे। उनकी पहली पत्नी का देहांत हो चुका है। इसके बाद से उनका अपने बड़े बेटे के साथ किसी बात को लेकर गंभीर विवाद चल रहा था, जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुके थे। पुलिस अब उनके मोबाइल कॉल डिटेल्स और पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगाल रही है ताकि ठोस वजह सामने आ सके।