
Gwalior News : डिजिटल जागरूकता के तमाम दावों के बीच मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस बार ग्वालियर से साइबर ठगी का अब तक का सबसे बड़ा मामला सामने आया है। रोशनी घर रोड (इंदरगंज) में रहने वले 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और चैंबर ऑफ कॉमर्स के निर्वाचन अधिकारी अशोक विजयवर्गीय से ऑनलाइन ट्रेडिंग और क्रिप्टो निवेश में भारी मुनाफे का झांसा देकर 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपए की ठगी की गई है। पीड़ित की शिकायत पर साइबर एवं हाईटेक अपराध थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की जांच निरीक्षक मुकेश कुमार नरोलिया को सौंपी गई है। पुलिस अब रकम ट्रांसफर करने में इस्तेमाल हुए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है।
ठगी की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई। अशोक विजयवर्गीय के व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से संदेश आया। मैसेज भेजने वाली ने अपना नाम दिव्या सिंह और खुद को निवेश सलाहकार बताया। उसने कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का दावा करते हुए ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश की सलाह दी। लगातार बातचीत के बाद उसने पीड़ित का भरोसा जीत लिया।
आरोपी ने एक लिंक (https://tradecboeus.cc/mobile//) भेजकर कथित ट्रेडिंग पोर्टल पर पीड़ित का अकाउंट खुलवाया। पोर्टल पर यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) और बिटकॉइन में निवेश के आकर्षक विकल्प दिखाई दिए। भरोसा बढ़ाने के लिए शुरुआत में पीड़ित को करीब 1.88 लाख रुपये का मुनाफा भी उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद पीड़ित ने यूनियन बैंक, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के अपने खातों से आरटीजीएस और यूपीआइ के जरिए आरोपियों द्वारा बताए गए एक दर्जन से अधिक खातों में 21.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कुछ समय बाद फर्जी पोर्टल पर पीड़ित को करोड़ों रुपये का मुनाफा दिखाई देने लगा। उन्होंने 33.25 करोड़ रुपये निकालने का अनुरोध किया तो ठगों ने कहा कि पहले 10.84 करोड़ रुपये आयकर के रूप में जमा करने होंगे। जब पीड़ित ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो कथित सलाहकार दिव्या ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह अपनी ओर से 5.34 करोड़ रुपये जोड़ रही है, पीड़ित केवल 5 करोड़ रुपये जमा कर दें। विश्वास में आकर पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में यह रकम भी जमा कर दी।
टैक्स जमा होने के बाद भी जब रकम नहीं मिली और दोबारा निकासी का प्रयास किया गया तो आरोपियों ने नया बहाना बनाया। इस बार कहा गया कि एक करोड़ रुपये से अधिक की निकासी के लिए रिस्क मार्जिन के रूप में दो लाख यूएसडीटी और जमा करने होंगे। इस मांग के बाद पीड़ित को संदेह हुआ। दोस्तों और परिचितों से चर्चा करने पर उन्हें एहसास हुआ कि वे बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।