HC Gwalior- मध्यप्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट ने ढाई दशक पुराने एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।
HC Gwalior- मध्यप्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट ने ढाई दशक पुराने एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड को हर्जाना देने का आदेश दिया है। भारत बिल्डर्स मामले में यह फैसला दिया गया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मामले में नए सिरे से सुनवाई करने की बात कही। इसी के साथ 26 साल पुरानी एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द कर दिया। भारत बिल्डर्स द्वारा सिंधिया इन्वेंस्टमेंट कंपनी पर नदी गेट पर बाउंड्रीवॉल बनाने के आरोप पर यह विवाद उठा था। ट्रायल कोर्ट ने डिक्री आदेश पारित कर दिया, जबकि कंपनी को नोटिस ही नहीं पहुंच पाए थे। कोर्ट ने इसे गंभीर गल्ती बताया जिससे प्रतिवादी को अपना पक्ष रखने का अवसर ही नहीं मिला।
ग्वालियर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए सिंधिया इन्वेस्टमेंट कंपनी पर हर्जाना लगाया है। कंपनी पर 15000 रुपए का हर्जाना लगाया गया है। कंपनी को यह हर्जाना एक माह में जिला कोर्ट में जमा कराने को कहा गया है।
हाईकोर्ट के अनुसार मामले में ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादी को डीम्ड सर्व मानकर इकतरफा आदेश पारित कर दिया था जबकि कंपनी को नोटिस ही नहीं पहुंच पाए थे। कोर्ट के अनुसार इस गंभीर त्रुटि के कारण प्रतिवादी को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं मिल सका। हाईकोर्ट ने मामले की नए सिरे से सुनवाई की भी बात कही है।
भारत बिल्डर्स ने आरोप लगाए कि सिंधिया इन्वेस्टमेंट कंपनी ने नदी गेट पर बाउंड्रीवॉल बनाई। इससे मोती तबेले का गेट बंद हो गया। कोर्ट से 1999 में एक्स-पार्टी डिक्री पारित हो गई जबकि सिंधिया इन्वेस्टमेंट कंपनी तक नोटिस ही नहीं पहुंचे थे। कंपनी ने जिला कोर्ट में आवेदन दिया जोकि खारिज हो गया। 2009 में सिंधिया इन्वेस्ट कंपनी ने हाईकोर्ट में सिविल रिवीजन दायर किया।
मामले में सुनवाई के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट ने 1999 में पारित एक्स-पार्टी डिक्री केस को नए सिरे से सुनने का आदेश दिया। दोनों पक्षों को अब 17 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होना होगा।