Government Land Cases: सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में अफसरों की लापरवाही पर ग्वालियर हाईकोर्ट का गुस्सा फूट पड़ा है। अदालत ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए साफ कहा कि राज्य की सुस्ती माना है।
MP News: सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में राज्य सरकार और उसके अधिकारियों की लगातार लापरवाही पर ग्वालियर हाईकोर्ट (Gwalior High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। एकल पीठ ने स्पष्ट कहा है कि राज्य शासन अपने ही मामलो की पैरवी में गंभीरता नहीं दिखा रहा, जिससे निजी पक्षों को अनुचित लाभमिल रहा है और सरकारी भूमि के हाथ से निकलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। कोर्ट ने इस स्थिति को अत्यंत गंभीर मानते हुए निर्देश दिया है कि अब सरकारी जमीन से जुड़े हर मामले में दायर होने वाले आवेदनों के साथ मुख्य सचिव का शपथपत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए।
अदालत ने कहा कि वह लगातार देख रही है कि कुछ कलेक्टर और अधिकारी सरकारी जमीन से जुड़े मामलों (Government Land Cases) में लापरवाही बरत रहे है। यह स्थिति निजी पक्षों को लाभवरिष्ठ अधिकारी सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में घोर लापरवाही बरत पहुंचाने की मंशा की ओर भी इशारा करती है। कोर्ट ने चेताया कि ऐसी लापरवाही से राज्य की बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्ति को गभीर नुकसान हो सकता है।
कोर्ट ने मुख्य सचिव से यह भी पूछा है कि क्या वे ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं, जिनकी भूमिका लापरवाह या संदिग्ध प्रतीत होती है। यदि किसी अधिकारी पर पहले से कार्रवाई की गई है तो उसका पूरा विवरण भी हलफनामे में देने के निर्देश दिए गए हैं। सेकंड अपील के लिए आवश्यक अनुमति (लीव टू अपील) का आवेदन भी सही तरीके से नहीं लगाया गया, जिसे 2014 में खारिज कर दिया गया था। इसके बाद बहाली का आवेदन लगभग दस साल तक लंबित रहा।
यह आदेश जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण केंद्र, दतिया द्वारा माया बलवानी के खिलाफ दायर सेकेंड अपील में पारित किया गया। प्रशिक्षण केंद्र ने 2800 स्क्वायर फीट भूमि पर अपना दावा किया था। हाईकोर्ट ने पाया कि अपील दाखिल करने की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां की गईं। शुरुआत में राज्य सरकार को विधिवत अपीलकर्ता न बनाकर अपील दायर की गई। बाद में राज्य को शामिल तो किया गया, लेकिन देरी के लिए कोई संतोषजनक कारण या शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। (MP News)