
Gwalior Truck Accident: गली वही है, घर वही है, लेकिन अब न पहले जैसी चहल-पहल है और न चेहरों पर मुस्कान । जिन गलियों में कल तक बच्चों की हंसी-ठिठोली और जिंदगी की रौनक थी, वहां अब खौफनाक सन्नाटा पसरा है। शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण हादसे ने गदाईपुरा क्षेत्र को ऐसा गहरा जख्म दिया है, जिसकी टीस शायद ही कभी कम हो। हादसे में क्षेत्र के पांच लोगों की मौत से हर परिवार झकझोर उठा है। वार्ड 8 और 15 की आपस में जुड़ी गलियों में मातम पसरा है।
वार्ड 8 के शिवनगर निवासी पवन राठौर और हेमंत राठौर की मौत ने परिजनों और पड़ोसियों को तोड़ दिया। वहीं, वार्ड 15 के माधवी नगर में चाचा अशोक त्यागी और उनके दो मासूम भतीजे लव और अमन भी हादसे का शिकार हो गए। एक ही परिवार से तीन अर्थियां उठीं तो हर आंख नम हो गई। परिजन भारी मन से तीनों शवों को पैतृक गांव जौरा (मुरैना) ले गए।
हादसे में घायल शुभम राठौर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। उसकी सलामती के लिए पूरा इलाका दुआ कर रहा है। गदाइपुरा की गलियां आज अपने खोए हुए बेटों की याद में सिसक रही हैं और घरों के बाहर पसरा सन्नाटा हादसे की भयावहता बयां कर रहा है।
हादसे के बाद पवन राठौर खुद दर्द से तड़प रहा था। पैर पर पहिया चढ़ने से खून बह रहा था, फिर भी उसे परिवार की चिंता थी। उसने फोन कर पास में रहने वाली बहन और अन्य परिजनों को हादसे की जानकारी दी। लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही हालात बिगड़ गए। पड़ोसी गणेशीराम ने बताया कि पवन और हेमंत राठौर अच्छे दोस्त थे और एक ही फैक्ट्री में काम करते थे। हादसे में हेमंत ने मौके पर दम तोड दिया, जबकि गंभीर घायल पवन की भी मौत हो गई। पवन की वह फोन कॉल अब परिजनों के लिए आखिरी आवाज बनकर रह गई है।
मुरैना के जौरा निवासी विद्याराम त्यागी के दो बेटों लव और अमन तथा उनके भाई अशोक त्यागी की हादसे में मौत से परिवार उजड़ गया। गदाइपुरा में रहने वाले अशोक निजी फैक्ट्री में मजदूरी करते थे और भतीजों से बेहद प्यार करते थे। हादसे वाले दिन उन्होंने बच्चों को साथ ले जाने से मना किया, लेकिन लव और अमन जिद पर अड़ गए। आखिरकार अशोक उन्हें साथ ले गए। किसी ने नहीं सोचा था कि बच्चों की यह जिद उनकी आखिरी यात्रा बन जाएगी। हादसे के बाद परिजन तीनों के शव पैतृक गांव जौरा ले गए। घर में अब मातम और अपनों को खोने का दर्द है।