MP News: मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण ने ग्वालियर की राजनीति की नींव हिला दी है। चारों विधानसभा सीटों पर हटाए गए नाम जीत के अंतर से कई गुना ज्यादा हैं, जिससे सियासी दलों की नींद उड़ गई है।
Voter List SIR: मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के जो आंकड़े सामने आए है, उन्होंने ग्वालियर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। शहर की चारों विधानसभा सीटों पर नए नाम जुड़ने की तुलना में हटाए गए नामों की संख्या इतनी अधिक है कि इसने भविष्य के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह अस्थिर कर दिया है। चौकाने वाली बात यह है कि चारों सीटों पर जितने वोटों से विधायक जीते थे, उससे तीन से चार गुना ज्यादा नाम लिस्ट से कट गए है। राजनीतिक गलियारों में डर इस बात का है कि कहीं ये कटे हुए नाम किसी दल विशेष के परंपरागत वोट बैंक के तो नहीं है। (MP News)
ग्वालियर दक्षिणः सबसे ज्यादा खतरे की घंटी पिछले चुनाव में ग्वालियर दक्षिण सीट पर सबसे रोमांचक मुकाबला हुआ था, जहां नारायण सिंह कुशवाह मात्र 2,536 वोटों से जीते थे। अब चौंकाने वाली हकीकत यह है कि इसी क्षेत्र से 56,552 नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यानी जीत के अंतर से करीब 22 गुना ज्यादा नाम गायब हो गए हैं। यहां मामूली सा हेर-फेर भी अगले चुनाव में सत्ता की चाबी छीन सकता है।
ग्वालियर पूर्वः 75 हजार नामों पर कैंची ग्वालियर पूर्व से सतीश सिंह सिकरवार 15,353 मतों के अंतर से जीते थे। लेकिन एसआइआर के दौरान यहां सबसे बड़ी सफाई हुई है। इस क्षेत्र से रिकॉर्ड 75,789 नाम काटे गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, बल्कि विपक्षी और सत्ता पक्ष दोनों के लिए रणनीतिक चुनौती बन गया है।
ग्वालियर और ग्रामीणः यहां भी डेंजर जोन ग्वालियर विधानसभा में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने 19,140 वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन यहां 55,653 मतदाताओं के नाम कट गए हैं। ग्वालियर ग्रामीण से साहब सिंह की जीत का अंतर सिर्फ 3,282 वोट था, जबकि सूची से 31,282 नाम कट गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में नाम कटने को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं।
आंकड़े सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को एक्टिव कर दिया है। जिन क्षेत्रों में अधिक नाम कटे हैं, वहां घर-घर जाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पात्र मतदाता का नाम सूची में दोबारा जुड़ सके। आने वाले दिनों में इसे लेकर निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के पास आपत्तियों का अंबार लगना तय है। (MP News)