वर्ष 2014 में बड़ी बहन के अभ्यास को देखकर हरमन में ताइक्वांडो के प्रति रुचि जगी
ग्वालियर. महज सात साल की उम्र में ताइक्वांडो शुरू करने वाले हरमन ने अपनी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। हाल ही में उन्हें भारतीय सेना में उत्कृष्ट खिलाड़ी कोटे से हवलदार पद पर नियुक्त किया गया।
हरमन की खेल यात्रा में कई महत्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं:
हरमन बताते हैं कि उनकी प्रेरणा बड़ी बहन और कोच सुनील नार्वे से मिली। परिवार का सहयोग और आत्मअनुशासन उनकी सबसे बड़ी ताकत है। कोरोना महामारी के दौरान भी उनका अभ्यास रुका नहीं, जिससे उनकी खेल यात्रा में कोई बाधा नहीं आई।
हरमन का लक्ष्य ओलंपिक और विश्व स्तर पर भारत के लिए पदक जीतना है। उनकी कहानी दिखाती है कि अगर मेहनत, जुनून और सही मार्गदर्शन मिले तो कोई भी युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाम हासिल कर सकता है।