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‘प्लॉट-मकान’ की रजिस्ट्री कराने का तरीका बदला, फेसलेस प्रणाली लागू

House registry: उप-पंजीयक कार्यालय दस्तावेजों को भौतिक रूप से स्वीकार नहीं करेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संपन्न की जाएगी।

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अब 1 करोड़ की रजिस्ट्री पर करीब 60 हजार की होगी बचत, महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50% तक छूट(photo-patrika)

अब 1 करोड़ की रजिस्ट्री पर करीब 60 हजार की होगी बचत, महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50% तक छूट(photo-patrika)

House registry: अब घर या प्लॉट खरीदने-बेचने के लिए रजिस्ट्री कराने के लिए उप-पंजीयक कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पंजीयन विभाग ने सेल डीड (विक्रय पत्र) को भी फेसलेस प्रणाली में शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके तहत क्रेता और विक्रेता बिना कार्यालय आए ऑनलाइन ही रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

नई व्यवस्था फिलहाल सरकारी संस्थाओं से जुड़े संपत्ति सौदों पर लागू की गई है। इसके तहत ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए), हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम और राजस्व विभाग से संबंधित संपत्तियों की रजिस्ट्री अब फेसलेस तरीके से होगी।

भौतिक रूप से स्वीकार नहीं होगा

इन मामलों में उप-पंजीयक कार्यालय दस्तावेजों को भौतिक रूप से स्वीकार नहीं करेगा। पूरी प्रक्रिया भोपाल स्थित साइबर पंजीयन कार्यालय से ऑनलाइन संपन्न की जाएगी। जिला पंजीयक अशोक शर्मा ने इस संबंध में सभी उप-पंजीयकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। पहले सरकारी संस्थाओं के मामलों में इसका प्रयोग किया जाएगा। यदि यह सफल रहा तो आगे बैंकों को भी फेसलेस सेल डीड की अनुमति दी जाएगी, इसके बाद बिल्डरों को भी यह सुविधा मिल सकेगी। अभी तक सेल डीड को फेसलेस प्रणाली से बाहर रखा गया था।

ऐसे काम करेगी नई व्यवस्था

पंजीयन विभाग में संपदा-2 सॉफ्टवेयर के माध्यम से पूरी प्रक्रिया संचालित होगी। क्रेता-विक्रेता का सत्यापन आधार ओटीपी के जरिए होगा, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी। पहचान के लिए गवाहों की जरूरत नहीं होगी। भोपाल में स्थापित साइबर पंजीयन कार्यालय से प्रदेश के किसी भी जिले की फेसलेस रजिस्ट्री की जा सकेगी। ग्वालियर में पहले से पावर ऑफ अटॉर्नी, एग्रीमेंट और वसीयत जैसे दस्तावेज फेसलेस हो रहे हैं।

क्या बोले अधिकारी

भोपाल साइबर पंजीयन कार्यालय से सरकारी संस्थाओं की सेल डीड फेसलेस की जाएंगी। इसके लिए सभी उप-पंजीयकों को निर्देश दे दिए गए हैं और अब जिले में भौतिक रूप से दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। - अशोक शर्मा, जिला पंजीयक