MP News: राज्य शासन की ओर से जवाब में बताया गया कि यही मुद्दा पहले ही जबलपुर स्थित प्रधान पीठ में तय हो चुका है।
MP News: हाईकोर्ट की युगल पीठ ने अतिथि शिक्षक नियुक्ति से जुड़े दिशा-निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को जारी गाइडलाइन वैध है और इनमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति अनिल वर्मा की खंडपीठ ने कृष्णा शर्मा बनाम मध्यप्रदेश शासन में में पारित किया। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि गाइडलाइन की उक्त शर्तों को असंवैधानिक घोषित किया जाए और उन्हें अतिथि शिक्षक पद के लिए पात्र माना जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उन्होंने एमफिल की डिग्री 10 जुलाई 2009 से पहले प्राप्त की है, इसलिए यूजीसी विनियम 2009 के अनुसार उन्हें नेट/स्लेट से छूट मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि उच्च शिक्षा विभाग की गाइडलाइन यूजीसी नियमों के विपरीत है, क्योंकि इसमें नेट/स्लेट या पीएचडी को अनिवार्य किया गया है।
राज्य शासन की ओर से जवाब में बताया गया कि यही मुद्दा पहले ही जबलपुर स्थित प्रधान पीठ में तय हो चुका है। सुषमा नेमा बनाम राज्य शासन प्रकरण सहित अतिथि शिक्षकों से जुड़ी कई याचिकाओं को 13 अक्टूबर 2025 को खंडपीठ ने खारिज कर दिया था और गाइडलाइन को पूरी तरह वैध माना गया था।
जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बनाए रखने से जुड़े नए नियमों पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि नए नियम ऐसे महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं, जिन्हें अनदेखा किया गया तो इसके 'बहुत दूरगामी परिणाम' हो सकते हैं और ये 'समाज को विभाजित' कर सकते हैं। बता दें कि सवर्ण जातियों के लोगों का कहना है कि अगर झूठी शिकायतों के खिलाफ कोई सजा नहीं होगी, तो उन्हें परेशान करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।