MP News: याचिकाकर्ता की शुरुआती नियुक्ति वर्ष 1986 में परियोजना आधारित थी, जिसे पेंशन योग्य सेवा नहीं माना जा सकता।
MP News: हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक घनश्याम कुल्मी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता की नियमित नियुक्ति 1 जनवरी 2005 के बाद हुई है, इसलिए वे नई पेंशन योजना (एनपीएस) के अंतर्गत ही आएंगे। ज्ञात है कि वरिष्ठ वैज्ञानिक राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ हैं।
याचिकाकर्ता की शुरुआती नियुक्ति वर्ष 1986 में परियोजना आधारित थी, जिसे पेंशन योग्य सेवा नहीं माना जा सकता। इसके बाद वर्ष 2004 में हुई संविदा नियुक्ति में भी स्पष्ट शर्त थी कि संविदा सेवा पेंशन लाभ के लिए मान्य नहीं होगी। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की पहली नियमित नियुक्ति 22 जनवरी 2007 को हुई, जिसमें नई पेंशन योजना लागू होने की शर्त स्पष्ट रूप से दर्ज थी।
कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने स्वयं नई पेंशन योजना का विकल्प भरा और वर्षों तक बिना आपत्ति के एनपीएस में अंशदान करता रहा। ऐसे में अब पुरानी पेंशन योजना की मांग करना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने समानता और भेदभाव से जुड़े तर्क भी अस्वीकार कर याचिका को निराधार बताया और खारिज कर दिया।
फैमिली पेंशन पर अहम फैसला
बीते कुछ महीनों पहले ही ग्वालियर हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन पर अहम फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा है कि मृत सरकारी कर्मचारी, अधिकारी के विवाहित पुत्र का पेंशन पाने का अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता। शादीशुदा होने पर भी बेटे की फैमिली पेंशन नहीं रोकी जा सकती। नियमों के अनुसार कर्मचारी, अधिकारी पुत्र को 25 वर्ष की उम्र तक फैमिली पेंशन मिलेगी, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित। ऊर्जा विभाग के एक कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन के एक केस में हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया।
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