ग्वालियर

कठोर रुख नहीं अपनाया तो लोग तथ्य छिपाकर अनुचित लाभ लेने का प्रयास करते रहेंगे: कोर्ट

हाईकोर्ट की युगल पीठ ने तथ्य छिपाकर रिट याचिका दायर करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शपथपत्र महज कागज का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि यह एक गंभीर शपथ बद्ध घोषणा है। यदि ऐसे मामलों में कठोर रुख नहीं अपनाया गया, तो लोग न्यायालय और अन्य प्राधिकरणों के समक्ष तथ्यों को छुपाकर अनुचित लाभ लेने की कोशिश करते रहेंगे।

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Sep 03, 2025
madhay pradesh high court

हाईकोर्ट की युगल पीठ ने तथ्य छिपाकर रिट याचिका दायर करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शपथपत्र महज कागज का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि यह एक गंभीर शपथ बद्ध घोषणा है। यदि ऐसे मामलों में कठोर रुख नहीं अपनाया गया, तो लोग न्यायालय और अन्य प्राधिकरणों के समक्ष तथ्यों को छुपाकर अनुचित लाभ लेने की कोशिश करते रहेंगे। कोर्ट ने तथ्य छिपाने के प्रयास पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही निर्देश दिया कि यह राशि एक माह के भीतर कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा की जाए, अन्यथा वसूली की कार्यवाही के साथ-साथ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही भी की जाएगी। कोर्ट ने रिट याचिका को खारिज कर दिया।https://www.patrika.com/madhya-pradesh-news

क्या है मामला

संजय यादव ने 29 नवम्बर 2024 को कलेक्टर ग्वालियर एवं अपर कलेक्टर द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उक्त आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर होकर पारित किए गए और इन्हें रद्द कर उसे संपत्ति का कब्जा लौटाया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि याचिकाकर्ता ने इसी आदेश को लेकर पहले ही ऋण वसूली अधिकरण ( डीआरटी) जबलपुर में अपील दायर की थी। 8 जनवरी 2024 को अंतरिम आदेश देते हुए यादव को चार किस्तों में 7 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया था, किंतु उन्होंने एक भी किस्त नहीं भरी। इतना ही नहीं, 30 जुलाई 2024 को तहसीलदार ग्वालियर ने संबंधित संपत्ति का कब्जा भी ले लिया था। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते समय डीआरटी की कार्यवाही और आदेशों का जिक्र ही नहीं किया। कोर्ट ने माना कि यह गंभीर तथ्य छिपाने का मामला है और याचिकाकर्ता ने जानबूझकर न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की।

Published on:
03 Sept 2025 11:04 am
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