ग्वालियर

Madhavi Raje : शादी के बाद ही तय हो गया था राजनीति में नहीं जाएंगी माधवी राजे, बेटे ज्योतिरादित्य को बढ़ाया आगे

Madhvi Raje Scindia Death: ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया का निधन हो गया। बता दें कि पति माधवराव सिंधिया के साथ राजनीति में एक्टिव रहने वाली माधवी खुद राजनीति से हमेशा दूर रहीं, यहां पढ़ें स्मृति शेष...

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बेटे ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया के साथ माधवी राजे सिंधिया.

माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) से विवाह के बाद यह तय हो गया था कि माधवी राजे सिंधिया (Madhavi Raje Scindia) कभी भी राजनीति में नहीं जाएंगी। माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) के निधन के बाद उनके पास मौका था, वे राजनीति में जा सकती थीं, क्योंकि तब ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) काफी छोटे थे। लेकिन माधवी राजे ने फिर भी राजनीति से किनारा ही रखा।

यही कारण था कि माधवराव सिंधिया के निधन के बाद माधवी ने बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजनीति में उतारा और पीछे रहकर उनका सपोर्ट किया। बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया के चुनाव में माधवी राजे सिंधिया ने पूरी कमान अपने पास रखी और प्रचार से लेकर सभाएं तक कीं।

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Madhavi Raje Scindia : पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ राजनीति में सक्रिय रहती थीं माधवी राजे सिंधिया

राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया के बीच विवाद के बाद माधवी राजे सिंधिया ने आपसी सूझबूझ से विवाद सुलझाया। माधवी राजे कार्यकर्ताओं का पूरा ख्याल रखती थीं। वर्ष-2001 के चुनाव में शिवपुरी में कार्यकर्ता बाल खांडे को गिरफ्तार कर लिया था, जैसे ही यह बात माधवी राजे को पता चली उन्होंने वकीलों से बात करके जल्द ही उनकी बेल कराई और जेल से बाहर निकलवाया।

एक किस्सा ये भी

माधवी राजे सिंधिया का शहर के सिंधिया कन्या विद्यालय और एएमआई शिशु मंदिर से गहरा लगाव था। वे इन दोनों स्कूलों की चेयरपर्सन थीं। जब से माधवी राजे सिंधिया एसकेवी और एएमआई शिशु मंदिर स्कूल की चेयरपर्सन बनीं तभी से इन दोनों स्कूलों ने नई ऊंचाइयों को छू लिया। इन दोनों ही स्कूल से पढ़कर निकलने वाले छात्र-छात्राएं आज देश-विदेश में ग्वालियर का नाम रोशन कर रहे हैं।

-जैसा बालखांडे ने पत्रिका को बताया।

स्कूल की बच्चियों की खुशी और सुरक्षा का रखती थीं खास खयाल

सिंधिया कन्या विद्यालय की प्रिंसिपल निशि मिश्रा ने बताया कि स्कूल की स्थापना 1956 में हुई थी। एसकेवी का नाम आज देश के चुनिंदा स्कूलों में लिया जाता है, इसका पूरा-पूरा श्रेेय माधवी राजे को ही जाता है। बालिकाओं को शिक्षित करने के उद्धेश्य से प्रारंभ किए गए एसकेवी की बिल्डिंग के नवीनीकरण से लेकर यहां दो हॉस्टल, एक स्वीमिंग पूल बनाने में उनका पूरा योगदान रहा।

वे न्यू एजुकेशन, रोबोटिक्स लैब, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की पक्षधर थीं। स्कूल की बच्चियां पीछे ना रहें इसका वे हमेशा ध्यान रखतीं थीं। सबसे खास बात वह स्कूल की छात्राओं की खुशी और उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखतीं थीं। स्कूल की स्टूडेंट्स जब अच्छे नंबरों से पास होती थीं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता था। समय-समय पर वे स्कूल के हर प्रोजेक्ट में रुचि लेती थीं, साथ ही हमें भी लगातार इंस्ट्रक्शन दिया करती थीं। वे कलामय जीवन की पक्षधर भी थीं।

स्कूल की प्रगति का रखतीं थीं पूरा ध्यान

एएमआई शिशु मंदिर की प्रिंसिपल करुणा खरे ने बताया कि 1945 में स्थापित किए गए इस स्कूल में मिडिल के बाद सीनियर क्लासेज प्रारंभ हुईं। उनकी देखरेख में ही 2021 में यहां सीबीएसई बोर्ड प्रारंभ हुआ और स्कूल के रिजल्ट भी शत-प्रतिशत रहे हैं। स्कूल की प्रगति के लिए कई बार नई चीजों से भी अवगत कराया करती (Madhavi Raje Scindia) थीं।



Updated on:
16 May 2024 12:15 pm
Published on:
16 May 2024 12:09 pm
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