
Gwalior news: थाली में खुशबू और स्वाद बढ़ाने वाला मसाला अगर अपनी असली पहचान खो दे तो स्वाद के साथ सेहत भी खतरे में पड़ सकती है। त्योहारों के मौसम में मसालों की मांग बढ़ते ही मिलावट का खेल भी तेज हो जाता है। काली मिर्च को भारी और चमकदार दिखाने से लेकर जीरे-सौफ को ज्यादा रंगदार बनाने तक, मिलावटखोर कम लागत में ज्यादा मुनाफे का रास्ता तलाशते हैं।
पिसे मसालों में तो मिलावट का खेल और आसान है, क्योंकि ग्राहक आंख से उसकी असलियत पकड़ ही नहीं पाता। शहर में आम दिनों में जहां मसालों में मिलावट जारी है, वहीं त्योहारी सीजन आते ही इसमें जमकर बढ़ोतरी हो जाती है। इधर फूड विभाग नदारद दिखाई देता है। दाल बाजार के वरिष्ठ कारोबारी गोविंद राय सिंह बताते हैं कि अब मसालों में मिलावट का अंश 50 फीसदी से भी अधिक हो चुका है।
मसाले जितने अस्वाभाविक रूप से चमकदार या एक समान रंग के दिखाई दें, ग्राहक को उतना ही सावधान रहना चाहिए। साबुत मसालों को प्राथमिकता देना और भरोसेमंद विक्रेता से खरीदना बेहतर है। पिसा मसाला लेते समय पैकेट पर लाइसेंस संबंधी जानकारी, पैकिंग, तिथि और अन्य विवरण जरूर देखें। एफएसएसएआइ उपभोक्ताओं के लिए घर पर मिलावट की प्राथमिक जांच संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराता है।
कुछ समय पूर्व दाल बाजार व्यापार समिति ने बाजार में मिलावट करने वालों पर नजर रखने के लिए पांच लोगों की टीम बनाए जाने की बात कही थी। व्यापारियों के बीच इस टीम को काफी चर्चा मिली, लेकिन अब बाजार में इसकी सक्रियता दिखाई नहीं देने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल है कि मिलावट पर निगरानी आखिर कौन करेगा ?
डॉ. मनीष शर्मा, मेडिसिन विभाग जीआरएमसी का कहना है कि मिलावटी या घटिया गुणवत्ता वाले मसालों का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसानदायक हो सकता है। इनमें मिलाए जाने वाले कृत्रिम रंग, धूल-मिट्टी, स्टार्च, रसायन या अन्य अशुद्धियां शरीर में विषैले प्रभाव पैदा कर सकती हैं। इनके सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, एलर्जी और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक दूषित मसालों का सेवन करने से लिवर और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उपभोक्ताओं को पैकेटबंद मसाले लेते समय लाइसेंस, गुणवत्ता चिह्न, पैकिंग और एक्सपायरी डेट अवश्य जांचनी चाहिए।
सौंफ-जीरा में सिंथेटिक कलर: पुरानी, पीली पड़ी सौंफ और जीरे को चमकदार दिखाने के लिए मेटानिल येलो और सडान कलर जैसे केमिकल रंगों का इस्तेमाल हो रहा है। ये रंग कैंसर तक का कारण बन सकते हैं। पानी में डालते ही इनका रंग तुरंत छूट जाता है।
धनिया-हल्दी-मिर्च पाउडर में बुरादा: धनिया-हल्छी मिर्च पाउडर में भी मिलावट की जा रही है। इसमें गेहूं का चोकर, लकड़ी का बुरादा और ईंट का चूरा मिलाया जा रहा है। हल्दी में पीला रंग और मिर्च में सूडान रेड।
इलायची में नकली घास: छोटी इलायची को बड़ा और हरा दिखाने के लिए उस पर हल्का तेल और हरा रंग चढ़ाया जाता है। कुछ जगह तो असली इलायची के खाली छिलके में दूसरी घास भरकर बेच दी जाती है।
काली मिर्च में ऑयल की पॉलिश: असली काली मिर्च खुरदरी और हल्की सफेद परत वाली होती है। मिलावटखोर इसे सस्ते मिनरल ऑयल या खाने के तेल में मिलाकर पॉलिश करते हैं। इससे मिर्च काली, चमकदार और बड़ी दिखती है। यह तेल पेट, लीवर और आंतों के लिए बेहद खतरनाक है।
-बहुत ज्यादा चमकदार और अस्वाभाविक रंग वाले मसाले न खरीदें।
-संभव हो तो साबुत मसाले खरीदकर घर पर पीसें।
-खुले मसालों की जगह विश्वसनीय पैक्ड उत्पाद लें।
-पैकेट पर लाइसेंस, तिथि और अन्य अनिवार्य जानकारी जरूर देखें।
-शक होने पर बिल संभालकर खाद्य विभाग में शिकायत करें।