स्टेटकाल के समय बने लक्कडख़ाना पुल के चौड़ीकरण की योजना पूरी तरह फेल हो गई है। पुल को चौड़ा करने के लिए शुरू की गई खुदाई में महज 2 फीट पर ही भूजल निकल आया, जो बार-बार पंप से निकालने के बावजूद खत्म नहीं हो रहा। हालात इतने खराब हैं कि करीब 5 मीटर गहराई […]
स्टेटकाल के समय बने लक्कडख़ाना पुल के चौड़ीकरण की योजना पूरी तरह फेल हो गई है। पुल को चौड़ा करने के लिए शुरू की गई खुदाई में महज 2 फीट पर ही भूजल निकल आया, जो बार-बार पंप से निकालने के बावजूद खत्म नहीं हो रहा। हालात इतने खराब हैं कि करीब 5 मीटर गहराई तक भी ठोस सतह नहीं मिली, जमीन के भीतर सिर्फ गाद और कचरा ही भरा मिला। इस गंभीर तकनीकी असफलता के बाद नगर निगम को पूरा डिजाइन रद्द कर नया डिजाइन तैयार कराने पर मजबूर होना पड़ा है।पहले इस परियोजना की लागत 1 करोड़ 79 लाख रुपये तय की गई थी, लेकिन डिजाइन फेल होने और नया पुल बनाने के फैसले के बाद अब लागत बढ़कर करीब 2.15 करोड़ रुपये हो जाएगी।
अब चौड़ीकरण नहीं, पूरा पुल ही बदलेगा
पहले की योजना में पुराने पुल को यथावत रखते हुए उसके दोनों ओर 3-3 मीटर चौड़े नए हिस्से बनाकर जोड़ने का प्रस्ताव था। इसी के तहत पिलर भी खड़े कर दिए गए थे, लेकिन खुदाई शुरू होते ही निगम की अधूरी तैयारी सामने आ गई। अब निर्णय लिया गया है कि पुराने पुल को पूरी तरह तोड़कर उसकी जगह नया पुल बनाया जाएगा। नया पुल पहले से बड़ा होगा और इसमें पुराने पुल की तरह कर्व भी रखा जाएगा। इसके लिए पुराने पुल के लगभग 5 मीटर पीछे और 5 मीटर आगे तक नया निर्माण किया जाएगा।
6 मीटर का पुल, अब 12 मीटर चौड़ा
वर्तमान में लक्कडख़ाना पुल की चौड़ाई सिर्फ 6 मीटर है, जबकि यहां ईदगाह की ओर से, रॉक्सी पुल की तरफ से, सिकंदर कंपू से और माधौगंज आने-जाने का पूरा ट्रैफिक गुजरता है। चारों दिशाओं से आने वाले वाहनों और घनी बस्ती के कारण अक्सर लंबा जाम लगता है। इसी दबाव को देखते हुए अब पुल को 12 मीटर चौड़ा बनाने का फैसला किया गया है, ताकि ट्रैफिक सुचारु रूप से निकल सके।
नाले पर सड़क बनी, अब भुगत रहा शहर
लक्कडख़ाना पुल के नीचे से होकर गुजरने वाला जिंसी नाला (नाला नंबर 1, 2 और 3) गुढ़ी-गुढ़ा नाका क्षेत्र से बहते हुए छप्परवाला पुल पर स्वर्णरेखा नदी में मिलता है। नगर निगम ने इस नाले को पाटकर सड़क बना दी, जिससे वर्षों में नाले की गहराई कम होती चली गई। अब उसी का नतीजा है कि जमीन के भीतर गाद, कचरा और भूजल जमा है, जिसने पुल निर्माण को संकट में डाल दिया।
पुराना मकान और मंदिर बने बड़ी बाधा
नए पुल के निर्माण में एक भयप्रद घोषित पुराना मकान और मंदिर भी रोड़ा बने हुए हैं। मकान हटाने के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजा जा चुका है, जबकि मंदिर को थोड़ा छोटा करने को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों और मंदिर समिति के बीच बातचीत की जा रही है।