
ग्वालियर . गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेङ्क्षटग बोर्ड (एमएआरबी) ने महाविद्यालय में एमबीबीएस की वार्षिक प्रवेश क्षमता 200 से बढ़ाकर 250 सीटें करने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह अनुमति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही प्रभावी होगी। एनएमसी ने 12 जुलाई को जारी 50 अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश की स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही जीआरएमसी अब प्रदेश के उन गिने-चुने शीर्ष सरकारी मेडिकल कॉलेजों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां प्रतिवर्ष 250 विद्यार्थियों को एमबीबीएस में प्रवेश मिलता है। नियमों के मुताबिक कुल सीटों में से 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटा के माध्यम से मेडिकल काउंसङ्क्षलग कमेटी (एमसीसी) द्वारा भरी जाएंगी, जबकि शेष 85 प्रतिशत सीटों पर राज्य स्तरीय काउंसङ्क्षलग (स्टेट कोटा) के माध्यम से दाखिले होंगे। एमबीबीएस की 50 अतिरिक्त सीटें बढ़ने से अब ग्वालियर-चंबल संभाग सहित पूरे प्रदेश के अधिक से अधिक प्रतिभावान विद्यार्थियों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। दरअसल हर वर्ष कई होनहार छात्र महज कुछ अंकों के अंतर से मेडिकल सीट पाने से वंचित रह जाते थे। सीटें बढ़ने से अब ऐसे विद्यार्थियों का डॉक्टर बनने का सपना साकार होने की राह आसान हो जाएगी। वहीं दूसरी ओर भविष्य में मध्य प्रदेश को अधिक संख्या में प्रशिक्षित और विशेषज्ञ डॉक्टर भी मिल सकेंगे।
संकल्प हुआ पूरा
शायद ही महाविद्यालय के लिए इससे बड़ी कोई और उपलब्धि होगी। प्रदेश के कई नए मेडिकल कॉलेजों को पहले ही 250 सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिल चुकी थी, जबकि हमारे यहां 200 सीटों पर ही प्रवेश हो रहे थे। मैंने पदभार संभालते ही यह संकल्प लिया था कि हर हाल में सीटों की संख्या 250 तक लेकर जाना है।
डॉ. आरकेएस धाकड़, डीन, जीआरएमसी