mp news: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि फरियादी सशर्त सुपुर्दगी बॉन्ड प्रस्तुत करता है, तो बैंक खाते में जमा कराई गई राशि उसे वापस की जा सकती है।
mp news: मध्यप्रदेश के ग्वालियर के विशेष सत्र न्यायालय ने ईओडब्ल्यू के एक प्रकरण में जब्त किए गए पांच लाख रुपए फरियादी को लौटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि फरियादी सशर्त सुपुर्दगी बॉन्ड प्रस्तुत करता है, तो बैंक खाते में जमा कराई गई राशि उसे वापस की जा सकती है। अदालत का कहना है कि इस रकम से जुड़े आवश्यक साक्ष्य पहले ही सुरक्षित किए जा चुके हैं, ऐसे में अब राशि को साक्ष्य के रूप में रखने की आवश्यकता नहीं है।
मामला साल 2020 का है तब नवंबर के महीने में ग्वालियर नगर निगम के तत्कालीन सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा को ईओडब्ल्यू की टीम ने पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सिटी सेंटर से रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। तत्कालीन सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा ने शहर के थाटीपुर के सुरेश नगर में पानी की टंकी के पास रहने वाले बिल्डर धर्मेंद्र भारद्वाज से ये रिश्वत ली थी। बिल्डर धर्मेन्द्र की सुरेश नगर में 19 हजार स्क्वायर फीट जमीन थी। जिस पर वह मल्टी बनाना चाहते थे लेकिन प्रदीप वर्मा ने इमारत पर बुलडोजर लगवा दिया था।
तुड़ाई के डर से सहमे बिल्डर ने सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा से बात की तो तुड़ाई रूकवाने के एवज में उन्होंने 50 लाख रुपए की मांग की थी। बिल्डर ने कोरोना के चलते आर्थिक संकट बताया तो तय हुआ कि 10 लाख रुपए अभी दे दो और बाकी की रकम बाद में दे देना। तब बिल्डर ने ये भी बताया था कि वो 10 लाख रुपये तत्काल सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा को दे चुका था। इसके बाद भी सिटी प्लानर बाकी रकम के लिए उस पर दबाव बना रहे थे। बाद में दोनों पक्षों में बातचीत के बाद सौदा 25 लाख रुपए में तय हो गया था। इसी दौरान बिल्डर ने रुपए मांगने की शिकायत ईओडब्ल्यू में दर्ज करा दी थी। जिसके आधार पर ईओडब्ल्यू ने बिल्डर से 5 लाख रुपये रिश्वत लेते प्रदीप वर्मा को रंगेहाथों पकड़ा था। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने बरामद की गई रकम का पंचनामा, फोटोकॉपी और अन्य विवरण तैयार कर अदालत के आदेश पर बैंक के शासकीय खाते में जमा करा दिए थे। अब कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि फरियादी से सुपुर्दगी बॉन्ड लेने के बाद रिफंड वाउचर जारी कर पांच लाख रुपए वापस किए जाएं।