ठेकेदार-अफसरों की मिलीभगत से शहरवासी परेशान शहर में शुद्ध पेयजल सप्लाई के नाम पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपये लुटा रहा है, लेकिन जनता को मिल रहा है गंदा, बदबूदार और कई जगहों पर बिल्कुल पानी नहीं। अमृत योजना से टंकी और तिघरा प्लांट का साफ पानी पहुंच चुका है, फिर भी बोरवेलों (मोटर) […]
ठेकेदार-अफसरों की मिलीभगत से शहरवासी परेशान
शहर में शुद्ध पेयजल सप्लाई के नाम पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपये लुटा रहा है, लेकिन जनता को मिल रहा है गंदा, बदबूदार और कई जगहों पर बिल्कुल पानी नहीं। अमृत योजना से टंकी और तिघरा प्लांट का साफ पानी पहुंच चुका है, फिर भी बोरवेलों (मोटर) से गंदगी की सप्लाई जारी है। पीएचई के सैंपल में पानी फेल होने के बावजूद ठेकेदार और अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है, और 5 लाख से ज्यादा आबादी इस जहर के पानी पर निर्भर है।जबकि बोरवेल (मोटर) में मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपए और बिजली बिल के नाम करोड़ों रुपए खर्च हो रहे है। इन सबके बाद भी कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है।
बोरवेल मरम्मत का 'घोटाला' खेल: 2603 बोरवेलों पर 3.90 करोड़ सालाना खर्च, लेकिन मरम्मत 24 घंटे में नहीं, 7-10 दिन में
नगर निगम क्षेत्र में कुल 2603 बोरवेल हैं, जिनकी मरम्मत के नाम पर हर बोरवेल पर 15-18 हजार रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं। अगर औसत 15 हजार भी मानें तो कुल 3 करोड़ 90 लाख 45 हजार रुपये सिर्फ मरम्मत पर उड़ जाते हैं। इसके अलावा हर महीने 8 करोड़ रुपये का बिजली बिल फिर भी शहर में पानी का संकट गहरा रहा है।
किस बोरवेल (मोटर) पर बिजली का बिल खर्च
24 घंटे की जगह सात दिन में हो रही सही
ठेकेदारों की मनमानी से बोरवेल खराब होने पर 24 घंटे में रिपेयर की बजाय 7-10 दिन लग जाते हैं। अफसर और ठेकेदारों में समन्वय की कमी से जनता त्रस्त है। शिकायतें महापौर, सभापति, आयुक्त, कार्यपालन यंत्री और पार्षदों तक पहुंच रही हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।
ठेकेदारों का 'राज' और इलाकों में सबसे ज्यादा शिकायतें
दक्षिण और पूर्व विधानसभा में लोग बोरवेल मोटर खराब होने पर ठेकेदारों की अनसुनी से परेशान हैं। जहां तिघरा या टंकी से पानी आ रहा है, वहां भी बोरवेल (मोटर) का गंदा पानी मिल रहा है।
आयुक्त ने लगाई फटकार, अब सर्वे शुरू लेकिन सवाल वही
नगर निगम आयुक्त ने मोटर सही नहीं होने की शिकायत आने पर ठेकेदारों और अफसरों को जमकर फटकार लगाई है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि बोरवेल वाले क्षेत्रों में सर्वे कर गंदा/बदबूदार पानी वाली बोरवेल तत्काल बंद की जाएंगी। जहां तिघरा या टंकी से सप्लाई है, वहां बोरवेल बंद कराई जाएंगी। ठेकेदार-अफसर समन्वय बनाकर काम करें, कहीं पानी की समस्या नहीं आएगी। लेकिन शहरवासी पूछ रहे हैं सिर्फ बोरवेल बंद होंगे या जिम्मेदारी भी तय होगी अगर समय पर मॉनिटरिंग, लाइन सुधार और वैकल्पिक सप्लाई पर काम होता तो आज यह संकट नहीं होता। बोरवेल बंद करना जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है स्वच्छ और सुरक्षित पानी की ठोस व्यवस्था।
शहर में जहां तिघरा व बोरवेल (मोटर) का पानी मिल रहा है। ऐसे स्थानों पर किसी एक का पानी अब मिलेगा,इसके लिए हम सर्वे भी करा रहे है। मैंने ठेकेदार व अफसरों को सख्त निर्देश दिए है कि वह समन्वय के साथ मिलकर काम करें। शहर में कहीं भी पानी की समस्या नहीं आनी चाहिए।
संघप्रिय आयुक्त नगर निगम ग्वालियर