ग्वालियर

125 करोड़ फूंके, फिर भी प्रदूषण घटाने के तमाम दावे फेल, नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित

प्रदूषण कम करने के नाम पर नगर निगम 125 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च, दर्जनों योजनाएं, मशीनें, सडक़ें, पार्क और फाउंटेन, लेकिन नतीजा जीरो। यही वजह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल ज़ोन बेंच ने ग्वालियर को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित कर दिया है। यानी वह शहर, जो पिछले पांच वर्षों से लगातार वायु […]

2 min read
Jan 20, 2026
झांसी रोड पर बीते छह महीने से खुदी पड़ी सडक़ पर दोपहर को उड़ती धूल।

प्रदूषण कम करने के नाम पर नगर निगम 125 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च, दर्जनों योजनाएं, मशीनें, सडक़ें, पार्क और फाउंटेन, लेकिन नतीजा जीरो। यही वजह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल ज़ोन बेंच ने ग्वालियर को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित कर दिया है। यानी वह शहर, जो पिछले पांच वर्षों से लगातार वायु गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। ग्वालियर अकेला नहीं है। उसके साथ भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सागर, उज्जैन, देवास और सिंगरौली को भी नॉन-अटेनमेंट सिटी की सूची में डाला गया है, लेकिन सवाल यह है कि इतने भारी-भरकम खर्च के बाद भी ग्वालियर की हवा क्यों नहीं सुधरी है।

कागजों में सफाई, ज़मीन पर प्रदूषण
नगर निगम और प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर योजनाओं की लंबी फेहरिस्त तैयार की, लेकिन इनमें से अधिकतर काम या तो दिखावटी रहे या फिर गलत प्राथमिकताओं पर आधारित। पांच साल में शहर की हवा पीएम 10 और पीएम 2.5 के मानकों पर बार-बार फेल होती रही, इसके बावजूद जिम्मेदार अफसर खर्च गिनाते रहे, रिजल्ट नही।

किस काम पर कितना खर्च और क्या मिला बदले में
5 रोड स्वीपिंग मशीनें 4.50 करोड़, 28 इलेक्ट्रिक टिपर 1.76, 8 फॉगर मशीनें 4, 50 किमी सीसी रोड 30.99 करोड़ सहित अन्य प्रोजेक्ट 24.96 करोड़ बावजूद इसके, धूल उड़ती रही, कचरा फैला रहा और एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंचता रहा है।

सडक़, पार्क और फाउंटेन पर हवा सुधरी नहीं
रेसकोर्स रोड निर्माण 3 करोड़, पटेल नगर सडक़ 2.50 करोड़, चेतकपुरी, पूर्व व ग्वालियर विधानसभा में इंटरलॉकिंग टाइल्स 10 करोड़ से अधिक, गांधी पार्क और अन्य स्थानों पर वाटर फाउंटेन करीब पांच करोड़, कम्पू मल्टी लेवल पार्किंग 3.76 करोड़ भी खर्च किए पर हवा नहीं सुधरी।

अर्बन फॉरेस्ट और हरियाली भी नहीं दे पाई राहत
बरा साइट अर्बन फॉरेस्ट फेज-1 पर 1.54 करोड़, बरा साइट फेज-2 में 1.19 करोड़, हरित क्षेत्रों का विकास 67 लाख, ओल्ड बरा डंपिंग साइट पर सिटी फॉरेस्ट : 2.32 करोड़ कागजों में हरियाली बढ़ी, लेकिन शहर की हवा आज भी सांस लेने लायक नहीं।
सीएनडी वेस्ट प्लांट दावा बड़ा, असर छोटा
सीएनडी वेस्ट प्लांट 2.57 करोड, प्लांट के लिए वाहन 2.18 करोड़, सोलर प्लांट 1.95 करोड़ पर खर्च किए। लेकिन निर्माण मलबा आज भी सडक़ों और खाली प्लॉट्स पर उड़ती धूल बनकर प्रदूषण बढ़ा रहा है।

ईवी वाहन भी नहीं बदल पाए तस्वीर
अधिकारियों के लिए 12 ईवी वाहन 1.72 करोड़ खरीदकर उन्हें इलेक्ट्रिक तो किया गया, लेकिन एक्शन अब भी पेट्रोल-डीजल जैसा सुस्त।एनजीटी की मुहर-प्रशासन की नाकामी पर सवाल एनजीटी द्वारा ग्वालियर को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित किया जाना सीधे-सीधे सिस्टम की नाकामी का प्रमाण है। यह फैसला बताता है कि योजनाएं सही नहीं थीं मॉनिटरिंग कमजोर रही और ज़मीनी अमल लगभग न के बराबर

क्या होती है नॉन-अटेनमेंट सिटी
नॉन-अटेनमेंट सिटी ऐसे शहर होते हैं जो लगातार कई सालों (आमतौर पर 5 साल से ज़्यादा) से राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं, खासकर पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषकों के स्तर में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनजीटी) के तहत ऐसे शहरों की पहचान की जाती है और उन्हें प्रदूषण कम करने के लिए विशेष कार्य योजनाएं बनाने और लागू करने के लिए चिह्नित किया जाता है।

इन विभागों को उठाने होंगे सख्त कदम
जिला प्रशासन,नगर निगम,स्मार्ट सिटी, प्रदूषण विभाग,परिवहन विभाग,हाउसिंग बोर्ड, पीडब्ल्यूडी,स्वास्थ्य विभाग में बायोमेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण करने के साथ सभी विभाग मिलकर प्रदूषण के खिलाफ सख्त कदम उठाए।

पीएम-10 का लेवल नीचे आया तो मिलेंगे 45 करोड़
नगर निगम को अभी 2024-25 की 30 से 22.5 करोड़ और 2025-26 में 31 में से 23.25 करोड़ यानी 75 प्रतिशत की राशि मिलने की उम्मीद थी। लेकिन वह तभी मिलेगी जब हवा में पीएम 10 का लेवल 50 पाइंट पर आ जाए,लेकिन अब यह काफी मुश्किल लग रही है।

Published on:
20 Jan 2026 12:33 pm
Also Read
View All

अगली खबर