पॉलिगॉन का दायरा बढ़ेगा, पास-पास की जमीनों में कम–ज्यादा का फर्क होगा खत्म, 2025-26 की गाइडलाइन की खामियां दूर कर रही सरकार, कई जगह रेट 50 से 100% तक बढ़ेंगे
जमीन की रजिस्ट्री में अब “कम रेट–ज्यादा रेट” का खेल बंद होने वाला है। पंजीयन विभाग वित्त वर्ष 2026-27 की गाइडलाइन नए फार्मूले पर तैयार कर रहा है, जिसमें शहर को सेक्टरों में बांटकर रेट तय किए जाएंगे। इसके लिए पॉलिगॉन का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है, ताकि पास-पास की लोकेशनों पर अलग-अलग कीमतें तय करने की व्यवस्था खत्म हो सके।
अभी स्थिति यह है कि दो सटी हुई लोकेशन पर जमीन की कीमतों में बड़ा अंतर है। इसी का फायदा उठाकर कई बार कम गाइडलाइन वाली जगह दिखाकर रजिस्ट्री करा ली जाती है। विभाग का नया मॉडल इस अंतर को खत्म करेगा। एक ही सेक्टर या पॉलिगॉन में शामिल सभी लोकेशन पर एक समान रेट लागू होगा। जिस इलाके की कीमत सबसे ज्यादा होगी, वही पूरे पॉलिगॉन की दर बनेगी। नतीजा जहां अब तक गाइडलाइन कम है, वहां अपने आप रेट बढ़ जाएंगे, कुछ इलाकों में यह बढ़ोतरी 50 से 100 फीसदी तक हो सकती है। भोपाल में नौ जनवरी को होने वाली बैठक में गाइडलाइन के नए स्वरूप पर फैसला होगा।
दरअसल, विभाग संपदा-2 सॉफ्टवेयर पर काम कर रहा है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित है और सेवाओं को पूरी तरह फेसलेस बनाने की दिशा में है। अब पक्षकार घर बैठे रजिस्ट्री से जुड़ा काम कर सकेगा। इसी डिजिटल बदलाव के साथ गाइडलाइन में मौजूद विसंगतियों को भी खत्म किया जा रहा है। अब तक गाइडलाइन वार्ड के हिसाब से बनती थी और हर लोकेशन की अलग दर होती थी। इससे स्टांप ड्यूटी चोरी की संभावना बनी रहती थी। इसी को रोकने के लिए गाइडलाइन को सेक्टरों में बांटा जा रहा है। अभी एक पॉलिगॉन में एक ही लोकेशन होती है, लेकिन आगे एक पॉलिगॉन में 40–50 तक लोकेशन शामिल हो सकती हैं। फिलहाल शहर और जिले में करीब 2400 पॉलिगॉन हैं।
ऐसे बदलेगा रेट का नक्शा
जैसे मुरार गांव में गाइडलाइन 19 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर है, जबकि उससे सटी करीब 10 लोकेशन पर 8 हजार, 10 हजार या 15 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर की दर है। नई व्यवस्था में इन सभी लोकेशनों को मुरार के पॉलिगॉन में शामिल कर दिया जाएगा। मतलब, अब इन इलाकों में भी सीधे 19 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर का रेट लागू होगा, चाहे जमीन कहीं भी हो।
पॉलिगॉन बदलकर हो रही थी चोरी
वर्ष 2025-26 में ऐसे मामले सामने आए, जहां रजिस्ट्री के समय जानबूझकर पॉलिगॉन बदल दिया गया, ताकि कम गाइडलाइन वाली लोकेशन पर संपत्ति दिखाकर कम स्टांप ड्यूटी दी जा सके। हालांकि कुछ केस पकड़े भी गए, लेकिन अब विभाग इस रास्ते को पूरी तरह बंद करने की तैयारी में है। पॉलिगॉन का दायरा बढ़ाकर आसपास की सभी लोकेशनों की दर समान कर दी जाएगी।
भविष्य की योजना: वार्ड नहीं, सेक्टर से चलेगा शहर
अभी वार्डों के भीतर सेक्टर बनाए जाएंगे, लेकिन आगे चलकर वार्ड व्यवस्था खत्म करने की योजना है। पूरे शहर को अलग-अलग सेक्टरों में बांटा जाएगा। उदाहरण के तौर पर, 66 वार्ड वाले शहर को लगभग 20 सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा और उन्हीं सेक्टरों के आधार पर गाइडलाइन तय होगी।
क्या होता है सेक्टर
सेक्टर किसी शहर या क्षेत्र का वह हिस्सा होता है, जहां समान गतिविधियां, सुविधाएं और विशेषताएं होती हैं। जैसे किसी शहर को रिहायशी, व्यावसायिक या औद्योगिक सेक्टर में बांटना।
इनका कहना है
“गाइडलाइन को सेक्टर में विभाजित किया जा रहा है। एक पॉलिगॉन में कई लोकेशनों को शामिल किया जाएगा, जिससे स्टांप ड्यूटी चोरी की संभावना खत्म होगी और सभी जगह एक समान दर लागू हो सकेगी।”
अशोक शर्मा, जिला पंजीयक