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‘स्मार्ट’ कैमरों की आंखों में धूल झोंक रहे अधूरे नंबर के वाहन

शहर को स्मार्ट बनाने और यातायात सुधारने के लिए सड़कों पर 'तीसरी आंख (आइटीएमएस ) का पहरा तो बैठा दिया गया, लेकिन शातिर वाहन चालकों ने इस हाईटेक सिस्टम की काट निकाल ली है।

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ग्वालियर. शहर को स्मार्ट बनाने और यातायात सुधारने के लिए सड़कों पर 'तीसरी आंख (आइटीएमएस ) का पहरा तो बैठा दिया गया, लेकिन शातिर वाहन चालकों ने इस हाईटेक सिस्टम की काट निकाल ली है। ग्वालियर की सड़कों पर करीब 2 लाख ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं, जिनकी नंबर प्लेट के साथ जानबूझकर 'छेड़छाड़ की गई है। मकसद सिर्फ एक-ट्रैफिक नियम तोड़ते वक्त कैमरे नंबर न पढ़ सकें और ई-चालान घर न पहुंचे। यह खेल न केवल राजस्व को चपत लगा रहा है, बल्कि शहर की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है, क्योंकि अपराधी भी इसी 'ट्रिक का इस्तेमाल कर पुलिस को चकमा दे रहे हैं। ग्वालियर में वाहनों की संख्या 11 लाख के पार पहुंच चुकी है। इन्हें संभालने के लिए महज 219 पुलिसकर्मी हैं, इसलिए पूरा दारोमदार आईटीएमएस (आइटीएमएस) कैमरों पर है। पुलिस और स्मार्ट सिटी ने करीब 1100 कैमरे शहर में टांगे हैं, लेकिन जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में दोपहिया, ऑटो और लोडिंग वाहन चालकों ने नंबर प्लेट के एक या दो अंकों पर काली टेप लगा दी है, पेंट से नंबर मिटा दिया है या फिर स्टीकर चिपका दिए हैं। जब ये वाहन रेड लाइट जंप करते हैं या बिना हेलमेट निकलते हैं, तो कैमरे इनका अधूरा नंबर पकड़ते हैं, जिससे सॉफ्टवेयर ई-चालान जेनरेट नहीं कर पाता।

नियम तोड़ना 'शगल, नंबर छिपाना कवच'

रिटायर्ड सीएसपी राकेश सिन्हा के मुताबिक, लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति अनुशासन की भारी कमी है। रेड लाइट जंप करना, हेलमेट न पहनना और तीन सवारी बैठना अब युवाओं की आदत बन चुकी है। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए वे नंबर प्लेट को 'कस्टमाइज करा लेते हैं या जानबूझकर उसे गंदा या कटा-फटा रखते हैं। यह प्रवृत्ति कानून के खौफ को खत्म कर रही है।

अपराधियों का 'सुरक्षित' हथियार

सिर्फ चालान से बचना ही इस खेल का हिस्सा नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि चेन स्नैचिंग, लूट और मोबाइल झपटने जैसी वारदातों में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश गाड़ियों के नंबर इसी तरह 'मैनिपुलेट' किए होते हैं। अधूरा नंबर होने के कारण वारदात के बाद सीसीटीवी फुटेज तो मिल जाता है, लेकिन अपराधी की पहचान और गाड़ी के मालिक तक पहुंचना टेढ़ी खीर साबित होता है।

फैक्ट फाइल

-कुल वाहन: 11 लाख से अधिक।
-ट्रैफिक फोर्स: मात्र 219 पुलिसकर्मी।
-तीसरी आंख: 1130 सीसीटीवी (पुलिस स्मार्ट सिटी)।
-बड़ा खतरा: करीब 2 लाख गाड़ियां 'संदिग्ध' नंबर प्लेट के साथ।
-जुगाड़: नंबर प्लेट पर टेप, ग्रीस, कीचड़ या अंकों को खुरचना।

इनका कहना है

नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध है। लोग ई-चालान से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं, जो अपराधियों को भी बढ़ावा दे रहा है। ऐसे वाहनों की निगरानी शुरू कर दी गई है। अमान्य नंबर प्लेट मिलने पर अब सख्त एक्शन लिया जाएगा।

  • अनु बेनीवाल, एएसपी, ग्वालियर