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कोर्ट की ग्वालियर नगर निगम पर टिप्पणी, इंदौर की त्रासदी से सबक लो, आंख मूंदने का नतीजा जानलेवा हो सकता है

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अवैध निर्माण के एक मामले में सुनवाई करते हुए ग्वालियर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि हाल के समय में इंदौर नगर निगम क्षेत्र में हुई एक गंभीर घटना, जिसमें 20 लोगों की जान गई और हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने संज्ञान लिया, […]

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अवैध निर्माण को 15 दिन में खुद नहीं तोड़ते हैं, तो निगम 16 वें दिन तोड़ देगी

अवैध निर्माण को 15 दिन में खुद नहीं तोड़ते हैं, तो निगम 16 वें दिन तोड़ देगी

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अवैध निर्माण के एक मामले में सुनवाई करते हुए ग्वालियर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि हाल के समय में इंदौर नगर निगम क्षेत्र में हुई एक गंभीर घटना, जिसमें 20 लोगों की जान गई और हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने संज्ञान लिया, यह स्थिति बताती है कि नगर निगम यदि अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं करेंगे तो उसके परिणाम घातक व जानलेवा हो सकते हैं। ग्वालियर नगर निगम की भी स्थिति चिंताजनक है। कोर्ट ने आयुक्त से कहा कि वे उस त्रासदी से सबक लें और शहर में अवैध निर्माण के प्रति शून्य सहनशीलता अपनाएं। कोर्ट ने कहा कि यदि नगर निगम समय रहते कार्रवाई नहीं करेगा तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने दुकानों के बाहर बिना अनुमति बने ढांचे को अवैध ठहराते हुए 15 दिनों में हटाने का निर्देश दिया है, अन्यथा 16वें दिन नगर निगम द्वारा ध्वस्तीकरण कर खर्च दुकान मालिकों से वसूले जाने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि बिल्डिंग परमिशन कोई रस्म नहीं है। अनुमति देते समय एफएआर, भूमि विकास नियम, मास्टर प्लान जैसे सभी पहलुओं पर विचार आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति इन प्रावधानों का उल्लंघन कर निर्माण करता है, तो उसे हटवाना नगर निगम की बाध्यता है। आदेश में यह भी टिप्पणी की गई कि ग्वालियर नगर निगम ने अपने दायित्वों का निर्वहन समुचित रूप से नहीं किया, जिस कारण अवैध निर्माण पनपते रहे।

क्या है मामला

दरअसल निहाल चंद व गोपाल चंद के बीच अवैध निर्माण का विवाद चल रहा है। दीवारें हटाकर 8 दुकानों को 5 कर दिया था। बाहर टीनशेड का निर्माण कर दिया था। यह मामला सबसे पहले जिला कोर्ट पहुंचा। छठवें अपर जिला न्यायाधीश ने आदेश दिया कि दुकानों के बाहर किए गए निर्माण को हटाकर आंतरिक दीवारों का निर्माण कराया जाए। इसके बाद निहाल चंद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट में इस मामले में बहस हुई। कोर्ट ने नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। अवैध निर्माण को हटाने का आदेश दिया है।