
जीवाजी विवि की ओर से लगाए गए ताले को तोडऩे के बाद दिखाते कर्मचारी।
जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नगर निगम की खुली चेतावनी और काम बंद कराने की कार्रवाई को खुलेआम चुनौती देते हुए परिसर में दोबारा बिना अनुमति निर्माण कार्य शुरू करा दिया। मामला तब विस्फोटक हो गया, जब निगम का अमला निर्माण सामग्री जब्त करने पहुंचा और विश्वविद्यालय प्रबंधन ने जब्ती वाहन को ही रोकते हुए गेट पर ताला जड़ दिया। हालात ऐसे बने कि निगम अमले को ही मौके पर बंधक बना लिया गया। स्थिति बिगड़ती देख मदाखलत टीम ने हथौड़ा चलाकर गेट का ताला तुड़वाया, तब जाकर निगम की कार्रवाई पूरी हो सकी। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव भी मौके पर पहुंचे। विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासन और निगम के बीच टकराव की स्थिति से अफरा-तफरी मच गई। कार्रवाई के दौरान क्षेत्राधिकारी अनिल श्रीवास्तव, मदाखलत अधिकारी सतेन्द्र भदौरिया सहित निगम के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
31 दिसंबर को काम बंद, फिर भी शुरू कराया निर्माण
नगर निगम द्वारा 31 दिसंबर को जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमति चल रहे निर्माण कार्य को लेकर स्पष्ट सूचना पत्र जारी कर काम बंद कराया गया था। उस दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन को सख्त चेतावनी दी गई थी कि यदि बिना अनुमति दोबारा निर्माण किया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। इसके बावजूद विवि प्रबंधन ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर दोबारा निर्माण कार्य शुरू करा दिया।
निगमायुक्त के निर्देश पर पहुंचा अमला
बिना अनुमति निर्माण की सूचना मिलते ही निगम आयुक्त संघ प्रिय के निर्देश पर भवन शाखा और मदाखलत अमला मौके पर पहुंचा। भवन अधिकारी वीरेन्द्र शाक्य ने बताया कि निरीक्षण में स्पष्ट रूप से सामने आया कि निर्माण कार्य के लिए नगम से कोई वैध अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बाद तत्काल निर्माण कार्य बंद कराया गया और मौके से निर्माण सामग्री जब्त की गई।
पीएम उषा योजना की आड़ में नियमों की अनदेखी
विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण कार्य प्रधानमंत्री उषा योजना के तहत कराए जा रहे हैं। यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका भूमिपूजन 30 अगस्त को स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। निर्माण कार्यों को 26 मार्च तक पूरा किया जाना है और यह काम मध्यप्रदेश शासन की भवन विकास निगम, भोपाल द्वारा कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का तर्क है कि सभी स्वीकृतियां भवन विकास निगम को लेनी थीं और इस संबंध में विश्वविद्यालय पहले ही पत्र लिख चुका है। लेकिन सवाल यह है कि जब निगम की अनुमति आवश्यक थी, तो बिना अनुमति निर्माण किसके आदेश पर और किसके संरक्षण में शुरू कराया गया
बिना अनुमति के अवैध निर्माण कार्य चल रहा था,जिसे रोकने के लिए और सामान जब्त करने के लिए टीम गई थी। अभी निर्माण कार्य को रुकवा दिया गया है। संबंधित को विधिवत परमिशन लेनी चाहिए थी।
टी प्रतीक राव अपर आयुक्त नगर निगम
निगम के नोटिस का जवाब उपयंत्री द्वारा दिया गया है। ताला लगाने की बात गलत है,कर्मचारी को इस संबंध में जानकारी नहीं थी। निर्माण कार्य से पहले सभी अनुमतियां ली गई है।
प्रो जेएन गौतम, प्रभारी कुलगुरु जेयू
नगर निगम से सभी स्वीकृतियां भवन विकास निगम द्वारा ली गई है। इसको लेकर हमने भवन विकास निगम को भी पत्र लिखा है। बंधक बनाने की बात गलत है।
राजीव मिश्रा, कुलसचिव जेयू
Updated on:
10 Jan 2026 11:42 am
Published on:
10 Jan 2026 11:37 am
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