ग्वालियर

जादुई हाजिरी से मान्यता! नर्सिंग की पढ़ाई थी 1266 डुप्लीकेट फैकल्टी के भरोसे, 1,608 फैकल्टी का नर्सिंग काउंसिल में रिकॉर्ड ही नहीं

प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े में नया खुलासा हुआ है। इस खुलासे पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। सीबीआइ जांच में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 633 नर्सिंग कॉलेज पूरी तरह कागजी फैकल्टी (शिक्षकों) के सहारे चल रहे थे। हैरानी यह है कि कागजों में 1,266 फैकल्टी मेंबर्स एक ही समय में कई कॉलेजों में पढ़ाते दिखाते गए।
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Sep 15, 2026
Nursing Council
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ग्वालियर. प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े में नया खुलासा हुआ है। इस खुलासे पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। सीबीआइ जांच में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 633 नर्सिंग कॉलेज पूरी तरह कागजी फैकल्टी (शिक्षकों) के सहारे चल रहे थे। हैरानी यह है कि कागजों में 1,266 फैकल्टी मेंबर्स एक ही समय में कई कॉलेजों में पढ़ाते दिखाते गए। 1,608 शिक्षकों का तो मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल के डेटा में कोई रिकॉर्ड या रजिस्ट्रेशन ही नहीं मिला। सीबीआइ ने नियमों और मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले कॉलेजों की विस्तृत जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़े की सीबीआइ जांच के आदेश दिए थे। बाद में सुनवाई व जांच का दायरा जबलपुर मुख्य पीठ में स्थानांतरित कर दिया गया। सीबीआइ ने जब प्रदेश भर के कॉलेजों के दस्तावेजों का मिलान किया तो मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे संस्थानों की असलियत सामने आ गई। संचालक सिर्फ मान्यता हासिल करने के लिए एक ही शिक्षक का नाम कई-कई कॉलेजों में दर्ज करा रहे थे।

नाम, पिता के नाम मैच नहीं हुए
सीबीआइ ने सत्र 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के लिए एमपी ऑनलाइन से संबद्धता व नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल का डेटा जब्त किया। डेटा फिल्टरिंग तकनीक से जांच की। फैकल्टी के नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि का मिलान किया तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया।

संबद्धता के लिए डुप्लीकेट फैकल्टी
सत्र 2020-21 में 561 कॉलेजों में 1,060 शिक्षक डुप्लीकेट मिले। उनकी कुल एंट्री 2,527 बार दर्ज थी।
सत्र 2021-22 में 285 कॉलेजों में 275 फैकल्टी की 601 बार डुप्लीकेट प्रविष्टियां मिलीं।
सत्र 2022-23 में 93 कॉलेजों में 59 शिक्षक 123 बार डुप्लीकेट पाए गए।
तीन वर्षों में 633 कॉलेजों में कुल 1,266 फैकल्टीज की 3,251 फर्जी/डुप्लीकेट एंट्रियां पकड़ीं।

कागजों में एक फैकल्टी तो 24 कॉलेजों में पढ़ा रहा था
-कई शिक्षक एक ही समय में दर्जनों कॉलेजों में 'पढ़ाते' दिखाए गए। फैकल्टी ताडूरी दीप्ती का नाम तीन साल में कुल 24 कॉलेजों के रिकॉर्ड में -मिला। सत्र 2020 में 11, 2021 में 10 और 2022 में 3 कॉलेज में अलग-अलग कॉलेज में नाम दर्ज मिला। कई अन्य शिक्षकों के नाम 10 से 15 कॉलेजों में एक साथ दर्ज मिले।
-लीना 15 कॉलेज (सत्र 2020 में 12 और 2021 में 3 कॉलेज) में पदस्थ थीं।
-हितेश गौतम 12 कॉलेज (सत्र 2020 में 9 और 2021 में 3 कॉलेज) में पदस्थ थे।
-अनीता शर्मा 10 कॉलेज (सत्र 2020 में 10 कॉलेज) में पदस्थ थीं।
-निशा थॉमस 10 कॉलेज (सत्र 2020 में 10 कॉलेज) में पदस्थ थीं।

शहर दर शहर फर्जीवाड़े का गणित
-ग्वालियर-चंबल के 8 जिलों में 194 कॉलेज डुप्लीकेट फैकल्टी के सहारे चल रहे थे। यहां 766 कागजी फैकल्टी के नाम दर्ज मिले।
-राजधानी भोपाल के 85 नर्सिंग कॉलेजों में डुप्लीकेट फैकल्टी की 578 प्रविष्टियां पकड़ी गईं।
-जबलपुर के 22 नर्सिंग कॉलेजों में कुल 84 डुप्लीकेट शिक्षकों के नाम मिले।
-इंदौर के 41 नर्सिंग कॉलेजों की जांच में 202 डुप्लीकेट फैकल्टी की एंट्री पाई गईं।

Updated on:
15 Sept 2026 05:58 pm
Published on:
15 Sept 2026 05:58 pm