MP News: गूगल के जरिए कस्टमर केयर या कंपनियों के नंबर तलाशने में कई लोग साइबर जालसाजों के झांसे में आकर ठगी का शिकार हुए हैं....
MP News: साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को फंसाते हैं और फिर उनकी जमा-पूंजी उड़ा लेते हैं। ऐसे में लोगों के लिए कदम-कदम पर जालसाज खतरा बनकर खड़े रहते हैं और जैसे ही आपने किसी तकनीक का प्रयोग किया, वे सक्रिय हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल है, गूगल की हेल्पलाइन का, जिसे ठगों की हैकलाइन कहा जाने लगा है। इसकी बानगी हैं, पुलिस के पास लगी शिकायतें।
इनमें पैसा गंवा चुके लोगों ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने गूगल पर सरकारी संस्था या निजी कंपनी का कस्टमर केयर तलाशा था, लेकिन बात ठगों से हो गई, फिर उनके बैंक खाते खाली हो गए। तब पता चला हेल्पलाइन पर तो जालसाज बैठे हैं। खास बात है ठगों के इस जाल में फंसने वालों में शिक्षित वर्ग के लोग भी काफी अधिक हैं।
दीनदयाल नगर निवासी रिटायर्ड प्रोफेसर श्रीप्रकाश बाजपेयी (78) ने पुलिस को बताया, शॉपिंग ऐप से ऑनलाइन सामान खरीदा था। पेमेंट भी किया, फिर भी बुकिंग कैंसिल हो गई और पैसा अटक गया। फिर पैसे वापस लेने शॉपिंग ऐप का गूगल पर कस्टमर केयर नंबर ढूंढा। यहां ठग ने शॉपिंग ऐप का कर्मचारी बनकर बात की। फिर एक फाइल भेजकर डाउनलोड करने को कहा। जैसे ही फाइल डाउनलोड की, मोबाइल हैक हो गया। उनके बैंक खाते से तीन बार में एक लाख रुपए की निकासी हो गई। शिकायत को चार महीने हो चुके हैं, लेकिन ठगों का पता नहीं चला है।
गूगल के जरिए कस्टमर केयर या कंपनियों के नंबर तलाशने में कई लोग साइबर जालसाजों के झांसे में आकर ठगी का शिकार हुए हैं। यह खुराफात पश्चिम बंगाल और झारखंड के साइबर फ्रॉड ज्यादा कर रहे हैं। ठगी से बचने गूगल की बजाए कंपनी की वेबसाइट से नंबर से तलाशें। - संजीव नयन शर्मा डीएसपी और प्रभारी स्टेट साइबर सेल ग्वालियर
नगरनिगम के डिप्टी कमिश्नर डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव को इसी तरह फंसा कर ठगों ने उनके खाते से 47 हजार 500 रुपए उड़ा लिए। डॉ. श्रीवास्तव ने अमेजन प्राइम का ओटीटी सब्सक्रिप्शन रिचार्ज किया था। सेवा चालू नहीं होने पर गूगल पर कंपनी का कस्टमर केयर नंबर ढूंढ़कर फोन किया। ठग ने अमेजन का कर्मचारी बनकर बात की और एपीके फाइल भेजी। जैसे ही फाइल डाउनलोड की, बैंक खाते से पैसे गायब हो गए।