तेज और धीमी लेकिन लगातार हुई बरसात से कोहरा गहरा गया है। इस वजह से सड?ों पर ट्रैफिककी रफ्तार तो थमी है, बल्कि 24 घंटे में शहर की निगरानी भी धुंधली हुई है। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी इतनी कम हो गई है चौकसी के लिए लगाए कैमरों की निगाहों पर धुंध की परत चढ़ […]
तेज और धीमी लेकिन लगातार हुई बरसात से कोहरा गहरा गया है। इस वजह से सड?ों पर ट्रैफिक
की रफ्तार तो थमी है, बल्कि 24 घंटे में शहर की निगरानी भी धुंधली हुई है। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी इतनी कम हो गई है चौकसी के लिए लगाए कैमरों की निगाहों पर धुंध की परत चढ़ गई है।
शहर की राउंड द क्लॉक निगरानी के लिए पुलिस और स्मार्ट सिटी ने कुल 913 सीसीटीवी लगाए हैं। इनमें भी पुलिस के 50 से ज्यादा कैमरे ठप हैं। स्मार्ट सिटी को भी सिर्फ 248 हाइ रेजोल्यूशन कैमरे पर ज्यादा भरोसा है।
उसकी नजर में इन कैमरे रात और खराब मौसम में काफी हद तक साफ फुटेज देने की ताकत है। बाकी कैमरे मौसम के तेवर बिगडऩे के साथ कमजोर पड़ते हैं। उधर सीसीटीवी सर्विलांस के कर्मचारी कहते हैं निगरानी पर खंभों पर लटके सीसीटीवी का रेग्युलर मेंनटीनेंस नहीं है। इनमें लैंस में धूल, जाले और कीट पतंगों का ढेर जमा है। इनसे आमतौर पर रात के वक्त साफ फुटेज मिलना मुश्किल रहता है। घने कोहने में इसमें साफ देखने की उम्मीद बेमानी है।
सीसीटीवी सर्विलांस टीम की नजर में कोहरे में हाई रेजोल्यूशन कैमरे को भी फोकस और कंट्रास्ट की समस्या
झेलना पड़ती है। कोहरे के बेहद बारीक कण रोशनी को बिखेर देते हैं। इस वजह से छवि का विवरण बिगडता है चेहरे या नंबर प्लेट अक्सर साफ नहीं दिखती। कई बार तापमान में उतार चढाव की वजह से भी लेंस पर नमी आती है तो कंडेनसेशन सेै फुटेज और धुंधला होता है। हालांकि वाहन या संदिग्ध व्यक्ति कैमरे के नजदीक है तो हाइ रेजोल्यूशन कैमरे का फुटेज साफ रहता है।
लगातार बरसात के बाद मंगलवार रात को मौसम ने करवट ली बुधवार सुबह से घना कोहरा छाया रहा। इससे शहर में दृश्यता घटकर करीब 30 मीटर पर सिमट गई। बाहरी इलाकों में कोहरे का असर और ज्यादा रहा।
घने कोहरे में सीसीटीवी पर असर पड़ता है। जब लोगों को आखों से साफ नहीं दिख रहा तो कैमरे पर कोहरे का असर होगा। कोहरे की वजह से छवि धुंधली होगी और फुटेज का फोकस भी गड़बड़ाता है।
भारत सिंह निरीक्षक रेडियो, सीसीटीवी सर्विलासं प्रभारी