. भारतीय रेलवे एक ओर यात्रियों को आधुनिक और हाईटेक सुविधाएं देने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रेनों में मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सवालों के घेरे में है। ग्वालियर से होकर गुजरने वाली कई ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों को गंदे और बदबूदार बेडरोल दिए जा रहे हैं।
ग्वालियर. भारतीय रेलवे एक ओर यात्रियों को आधुनिक और हाईटेक सुविधाएं देने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रेनों में मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सवालों के घेरे में है। ग्वालियर से होकर गुजरने वाली कई ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों को गंदे और बदबूदार बेडरोल दिए जा रहे हैं। हालत यह है कि एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को दागदार चादर, गंदे तकिए और बदबूदार कंबल के बीच यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है, रेलवे को पूरा किराया देने के बावजूद उन्हें साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल रही। सबसे ज्यादा शिकायतें रतलाम इंटरसिटी, बरौनी मेल और चंबल एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से सामने आई हैं। यात्रियों के अनुसार कई बार दी जाने वाली चादरें पहले से इस्तेमाल की हुई लगती हैं और उनमें तेल के दाग व दुर्गंध होती है।
हर महीने जुर्माना, फिर भी नहीं सुधरे हालात
सूत्रों के मुताबिक रेलवे प्रशासन को इस समस्या की पूरी जानकारी है। गंदे बेडरोल सप्लाई करने के कारण संबंधित लॉन्ड्री ठेकेदार पर हर महीने करीब 90 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। लगातार जुर्माने के बाद भी यात्रियों को साफ बेडरोल नहीं मिलना रेलवे की मॉनिटङ्क्षरग व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
शिकायत के बाद बदलते हैं बेडरोल
यात्रियों का आरोप है कि जब वे कोच अटेंडेंट से शिकायत करते हैं तो शुरुआत में कर्मचारी बहस करते हैं और समस्या को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं। लेकिन जैसे ही यात्री रेलवे हेल्पलाइन या सोशल मीडिया पर शिकायत दर्ज कराने की बात करते हैं, तुरंत बेडरोल बदल दिए जाते हैं। इससे साफ है कि कर्मचारियों को समस्या की जानकारी रहती है, लेकिन कार्रवाई केवल शिकायत के दबाव में होती है।
यात्रियों ने सुनाई परेशानी
रतलाम इंटरसिटी से 16 मई को ग्वालियर से इंदौर यात्रा करने वाली यात्री प्रेरणा माहेश्वरी ने बताया, एम-2 कोच में दी गई चादरों पर तेल के बड़े-बड़े दाग थे और उनसे बदबू आ रही थी। उनका कहना था कि एसी टिकट आरामदायक यात्रा के लिए लिया जाता है, लेकिन गंदगी के कारण पूरी रात परेशानी में गुजरती है। वहीं बरौनी मेल के बी-3 कोच में ग्वालियर से गोंडा यात्रा करने वाली यात्री जूही ने बताया, तकिए बेहद गंदे और बदबूदार थे। बेडरोल में तौलिया भी नहीं था, जिसे कई बार कहने के बाद उपलब्ध कराया गया।
पहले बेडरोल को लेकर काफी शिकायतें मिल रही थीं, जिसके चलते ठेकेदार पर जुर्माना लगाया गया था। हाल ही में बेडरोल का ठेका नए वेंडर को दिया गया है, जिसके कारण शुरुआती स्तर पर कुछ परेशानियां सामने आई हो सकती हैं। हालांकि यदि अभी भी यात्रियों को दिक्कत हो रही है तो मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी।
शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे