
MP Telecom News New Trend (photo: AI Generated)
MP Telecom News: टेलीकॉम मार्केट में वह दौर अब इतिहास हो गया है, जब लोग हर दूसरे महीने नई सिम जेब में डालकर घूमते थे और दुकानों पर सिम खरीदने के लिए कतारें लगती थीं। साल 2020 के कोविड काल में जिस इंटरनेट और सिम की डिमांड ने आसमान छुआ था, 2026 तक आते-आते वह ग्राफ अब धरातल पर आ गया है।
मध्यप्रदेश के हालिया आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि लोग अब नई सिम खरीदने के बजाय पुराने नंबर को ही सहेजने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। सिम कार्ड अब महज एक प्लास्टिक की चिप नहीं, बल्कि व्यक्ति की डिजिटल पहचान बन चुका है। यही वजह है कि सिम वेंडरों के पास सन्नाटा है, लेकिन मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी कराने वालों की संख्या बढ़ी हुई है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वॉल्यूम-लेड मार्केट (MP Telecom News) अब वैल्यूड्रिवन हो गया है। इसके तीन प्रमुख कारण हैं…
1. जेब पर भारी पड़ते टैरिफ: पिछले दो वर्षों में टेलीकॉम कंपनियों ने रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में 20 से 30 फीसदी तक का इजाफा किया है। अब दूसरा या तीसरा सिम कार्ड एक्टिव रखना बजट से बाहर हो रहा है।
2. ब्रॉडबैंड का फाइबर जाल: घर-घर फाइबर ऑप्टिक और वाई-फाई पहुंचने से मोबाइल डेटा की खपत सिमटी है। लोग घर पर हाई-स्पीड वाई-फाई का उपयोग करते हैं, जिससे अतिरिक्त सिम की जरूरत खत्म हो गई है।
3. वाई-फाई कॉलिंग: कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी वाई-फाई कॉलिंग की सुविधा ने नई सिम की जरूरत को खत्म किया है।
ट्राई के मार्च-2026 (TRAI 2026 Report) के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में नई सिम की बिक्री की रफ्तार बेहद सुस्त पड़ चुकी है। प्रदेश में कुल सक्रिय सिम 8.56 करोड़ हैं, लेकिन नए ग्राहकों की संख्या (नेट एडिशन) घटकर महज 2.45 लाख पर सिमट गई है। इसके उलट, अकेले मार्च के महीने में एमपी के 14 लाख (1.40 मिलियन) लोगों ने अपनी कंपनी (MP Telecom News) बदलने के लिए आवेदन किया। यह आंकड़ा पूरे देश में शीर्ष पर है। साफ है कि जनता नेटवर्क से तो नाराज है, लेकिन अपना नंबर बदलने का रिस्क नहीं लेना चाहती।
तकनीक के सबसे बड़े पैरोकार यानी युवा वर्ग ने भी नई सिम से दूरी बना ली है। इसके पीछे (MP Telecom News)कई मनोवैज्ञानिक और तकनीकी कारण हैं…
1- यूपीआइ और बैंक लिंक: आज बैंक अकाउंट, आधार, यूपीआइ, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप सब एक ही नंबर से लिंक होते हैं। नया नंबर लेने का मतलब है इन सभी सेवाओं को अपडेट करने का लंबा झंझट।
2- स्पैम कॉल्स का खौफ: नई सिम लेते ही अक्सर पुरानी कंपनियों के बकाया बिल या अवांछित मार्केटिंग कॉल्स आने शुरू हो जाते हैं। युवाओं के लिए अपना 'क्लीन और पुराना' नंबर ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
3- ई-सिम का बढ़ता चलन: प्रीमियम स्मार्टफोन्स से अब फिजिकल सिम स्लॉट धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। लोग प्लास्टिक की सिम खरीदने के बजाय पुराने नंबर को ही ई-सिम में कन्वर्ट करा रहे हैं।
पिछले कुछ समय में नई सिम का क्रेज काफी कम हुआ है। कंपनियां नए नंबरों की बिक्री के लिए सड़कों पर वेंडर खड़े करने को मजबूर हैं, फिर भी ग्राहक पुराने नंबर को पोर्ट कराना ही बेहतर समझ रहा है।'-सुधीर भदौरिया, टेलीकॉम जानकार
Published on:
18 May 2026 10:49 am
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