शहर सहित जिले में सरकारी जमीनों को खुदबुर्द करने को लेकर पटवारियों की भूमिका पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन पटवारी जमीनों को खुदबुर्द करने में नहीं चूक रहे। ऐसा ही एक मामला ग्राम मुरार का सामने आया है। कॉलम नंबर 12 में जमीन शासकीय (सीलिंग) दर्ज थी, लेकिन पटवारी ने जमीन के […]
शहर सहित जिले में सरकारी जमीनों को खुदबुर्द करने को लेकर पटवारियों की भूमिका पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन पटवारी जमीनों को खुदबुर्द करने में नहीं चूक रहे। ऐसा ही एक मामला ग्राम मुरार का सामने आया है। कॉलम नंबर 12 में जमीन शासकीय (सीलिंग) दर्ज थी, लेकिन पटवारी ने जमीन के नामांतरण के लिए उसे निजी बता दिया और रिपोर्ट तैयार कर नामांतरण का प्रकरण बना दिया। यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया तो जांच की गई। कलेक्टर रुचिका चौहान ने पटवारी राहुल दुबे को निलंबित कर दिया।
पटवारी राहुल दुबे ने 25 सितंबर 2025 को ग्राम मुरार में शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 3689/1 रकबा 0.2690 हेक्टेयर को अपनी रिपोर्ट में निजी बता दिया। रिपोर्ट में लिखा कि यह भूमि विक्रेता एवं अन्य के नाम भूमिस्वामी स्वत्व पर दर्ज है। भूमि वर्तमान अभिलेख में पट्टे माफी औकाफ, भूदान एवं अन्य शासकीय नहीं है। इसके साथ ही जमीन के नामांतरण का प्रकरण बना दिया। इसके बाद 14 नवंबर 2025 को दूसरी रिपोर्ट तैयार की, जिसमें लिखा कि आदेश का अमल करते समय पाया कि ग्राम मुरार के सर्वे क्रमांक 3689/1 के खसरे के खाना न. 12 में यह भूमि शासकीय दर्ज है। खाते की रिपोर्ट लगाते समय भूलवश मेरा ध्यान नहीं गया, जिसके कारण आदेश पारित किया गया। मामला संज्ञान में आने पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने पटवारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पटवारी ने जवाब में बताया कि उसने अपर कलेक्टर से अभिमत लिया था। इस मामले में अपर कलेक्टर से जवाब मांगा गया। अपर कलेक्टर ने बताया कि खसरों में सीलिंग अंकित होने के बाबजूद परीक्षण किए बिना नामांतरण का प्रस्ताव भेजा गया। कलेक्टर ने गलत रिपोर्ट लगाकर शासकीय जमीन का निजी बताकर नामांतरण के लिए रिपोर्ट देने पर पटवारी राहुल दुबे को निलंबित कर दिया है।