ग्वालियर

‘अरे भैया हमने तो 886 रुपए में बुक किया था सिलेंडर, अब 936 रुपए क्यों दें …’

MP News: जिन लोगों ने गैस सिलेंडर दो या तीन दिन पहले बुक किए थे, उनका कहना था कि जब हमने पुराने रेट पर सिलेंडर बुक किया था तो उसी पर हमें मिलना भी चाहिए।

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MP News: अरे भैया हमने तो दो दिन पहले गैस का सिलेंडर बुक किया था, उस समय तो रेट 886.50 रुपए थे। अब आप सिलेंडर के 936.50 रुपए मांग रहे हो। हम तो 886.50 रुपए ही देंगे। कुछ इसी तरह की चिकचिक दो दिन बाद भी एलपीजी यानी घरेलू गैस सिलेंडर घरों पर लेकर जाने वाले हॉकरों के साथ दिनभर हो रही है।

इसकी वजह थी सोमवार से एलपीजी के दामों में 50 रुपए की बढ़ोतरी करते हुए दाम 936.50 रुपए करना, जिन लोगों ने गैस सिलेंडर दो या तीन दिन पहले बुक किए थे, उनका कहना था कि जब हमने पुराने रेट पर सिलेंडर बुक किया था तो उसी पर हमें मिलना भी चाहिए।

देने पड़े 50 रुपए ज्यादा

सोमवार के दिन गैस एजेंसियों की छुट्टी होने के साथ ही इस दिन गैस सिलेंडर की डिलीवरी भी नहीं की जाती है। सोमवार को घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने से जिन लोगों ने रविवार को सिलेंडर बुक किया था, सोमवार की छुट्टी होने के कारण उन्हें भी मंगलवार को 50 रुपए अधिक देकर 936.50 रुपए का भुगतान करना पड़ा। रविवार के दिन बुकिंग करने वाले ग्राहकों से भी हॉकर की रुपयों के लेन-देन को लेकर चिकचिक होती रही।

दाम बदलते ही सॉटवेयर में हो जाते हैं अपडेट

ग्वालियर-चंबल एलपीजी फेडरेशन के कॉर्डिनेटर श्यामानंद शुक्ला ने बताया कि गैस सिलेंडर पर 50 रुपए बढऩे के बाद सुबह से ग्राहकों के फोन आते रहे। उनका कहना था कि हमने तो पुराने रेट में सिलेंडर बुक किया था, फिर बढ़े हुए दामों पर इसे क्यों दिया जा रहा है।

कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि इसकी शिकायत ऊपर तक करेंगे। हमने ग्राहकों से यही कहा कि इसमें गैस डीलर कुछ भी नहीं कर सकता है क्योंकि दाम बढ़ते या कम होते तुरंत ही सॉटवेयर में अपडेट हो जाते हैं। कई बार दाम कम हो पर गैस वितरक को घाटा भी उठाना पड़ता है।

पांच लाख का गैस डीलरों को फायदा

ग्वालियर में तीन गैस कंपनियों की 40 एजेंसियां काम कर रही हैं। प्रत्येक गैस एजेंसी लगभग 250 घरेलू गैस सिलेंडर स्टॉक में रखती हैं। ऐसे में 50 एक सिलेंडर पर 50 रुपए की बढ़त होने पर सीधे-सीधे गैस डीलरों को करीब 5 लाख रुपए का फायदा हुआ है। हालांकि जब सिलेंडर के दाम कम होते हैं उस समय उन्हें घाटा भी उठाना पड़ता है।

Published on:
10 Apr 2025 12:48 pm
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