ग्वालियर. पुलिस अब हाईटेक होकर अपराधियों के साथ-साथ अपने भीतर की व्यवस्थाओं पर भी डिजिटल लगाम कस रही है। थानों में पुलिस की तिजोरी कहे जाने वाले मालखानों की खस्ताहाल और असुरक्षित छवि अब बदलने वाली है। अंचल का पहला ई-मालखाना शहर के पड़ाव थाने में बनकर तैयार हो गया है। भोपाल के टीटी नगर […]
ग्वालियर. पुलिस अब हाईटेक होकर अपराधियों के साथ-साथ अपने भीतर की व्यवस्थाओं पर भी डिजिटल लगाम कस रही है। थानों में पुलिस की तिजोरी कहे जाने वाले मालखानों की खस्ताहाल और असुरक्षित छवि अब बदलने वाली है। अंचल का पहला ई-मालखाना शहर के पड़ाव थाने में बनकर तैयार हो गया है। भोपाल के टीटी नगर और इंदौर के गांधीनगर थाने के बाद ग्वालियर का पड़ाव थाना अब प्रदेश का तीसरा ऐसा डिजिटल केंद्र बन गया है, जहां जब्त किया गया हर सामान और सबूत अब क्यूआर कोड की निगरानी में रहेगा। अंचल के इस पहले ई-मालखाने को तैयार करने के पीछे एएसपी अनु बेनीवाल की करीब तीन महीने की कड़ी मेहनत और एक्सरसाइज है। इस नई व्यवस्था में इंसानी पहरेदारी से ज्यादा तकनीक पर भरोसा किया गया है। मालखाने में अब राउंड-द-क्लॉक सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी। जब भी कोई सामान जब्त होकर आएगा, उसे विधिवत पैक कर उसकी फोटो पोर्टल पर अपलोड की जाएगी और तुरंत एक यूनिक क्यूआर कोड जनरेट होगा।
एक क्लिक पर मिलेगा सामान, नहीं बहाना होगा पसीना
अक्सर देखा जाता है कि मालखानों में बरसों पुराने सामान और दस्तावेजों को खोजने के लिए पुलिसकर्मियों को घंटों पसीना बहाना पड़ता है। लेकिन ई-मालखाना सिस्टम में हथियार, नशीले पदार्थ, गहने, पैसे या जरूरी दस्तावेज कहां रखे हैं, इसकी सटीक लोकेशन कंप्यूटर पर एक क्लिक में मिल जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कोर्ट में समय पर साक्ष्य पेश करने में भी आसानी होगी।
चोरी और हेरफेर पर डिजिटल लॉक
ई-मालखाने का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुरक्षा है। मालखाने से कोई भी सामान बाहर जाएगा तो उसका डिजिटल ट्रैक रिकॉर्ड होगा। किस पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ने, कब और किस काम के लिए सामान निकाला और वापस कब रखा, इसका पूरा डिजिटल मूवमेंट वेब प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगा। बैकअप सिस्टम इतना मजबूत है कि डेटा के साथ छेड़छाड़ करना नामुमकिन है, जिससे मालखाने से सामान गायब होने या चोरी होने की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी।
इनका कहना है
पड़ाव थाने में ई-मालखाना बनाया गया है। यह व्यवस्था सुरक्षित और पूरी तरह पारदर्शी है। इससे मालखाने में रखे सामान की सतत निगरानी रहेगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की हेरफेर की गुंजाइश नहीं बचेगी। यह तकनीक पुलिस की कार्यप्रणाली को और अधिक विश्वसनीय बनाएगी।
— अरविंद सक्सेना, आईजी, ग्वालियर रेंज