ग्वालियर

ग्वालियर में प्रोजेक्ट ग्रेड इंडियन बस्टर्ड, 32 साल बाद 4000 हेक्टेयर में फिर से सोन चिरैया का घर

32 साल पहले तक शिवपुरी और ग्वालियर के घास मैदानों में विचरने वाली सोन चिरैया 1994 में गायब हो गई। घाटीगांव और तिघरा के प्राकृतिक आवासों से विलुप्त दुर्लभ पक्षी (गे्रट इंडियन बस्टर्ड) सोनचिरैया को अब दोबारा बसाने की तैयारी है।

less than 1 minute read
Jun 05, 2026
Great Indian Bustard
Son Chiraiya

ग्वालियर. 32 साल पहले तक शिवपुरी और ग्वालियर के घास मैदानों में विचरने वाली सोन चिरैया 1994 में गायब हो गई। घाटीगांव और तिघरा के प्राकृतिक आवासों से विलुप्त दुर्लभ पक्षी (गे्रट इंडियन बस्टर्ड) सोनचिरैया को अब दोबारा बसाने की तैयारी है। इसके लिए योजना बनाई गई है। इसमें 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रासलैंड विकसित किया जाएगा। राजस्थान के जैसलमेर की तरह ही प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड शुरू होगा। जैसलमेर से अंडे लाकर हैचिंग की जाएगी। इसके बाद दुलर्भ सोनचिरैया अपनी धरती पर फिर से विचरेगी।

बारिश बाद शुरू होगा प्रोजेक्ट
वन विभाग के अनुसार मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत बारिश के बाद होगी। घाटीगांव और तिघरा अभयारण्य क्षेत्र के चयनित हिस्सों को मिलाकर ग्रासलैंड बनाया जाएगा। यह सोन चिरैया का घर होगा। भोजन की व्यवस्था रहेगी। प्रजनन भी कर सकेगी।

जैसलमेर से लाएंगे अंडे
राजस्थान के जैसलमेर में सोन चिरैया की सीमित संख्या है। अंडे लाकर ग्वालियर के विशेष हैचिंग सेंटर में कृत्रिम रूप से विकसित किया जाएगा। चूजों को सुरक्षित वातावरण में बड़ाकिया जाएगा। बाद में ग्रासलैंड में छोड़ा जाएगा। जैसलमेर में प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के तहत अंडों की कृत्रिम हैचिंग कराकर सोन चिरैया की आबादी बढ़ाई जा रही है।

Published on:
05 Jun 2026 05:56 pm