ग्वालियर

Gwalior… 65 हजार यात्रियों की सुरक्षा अब एआइ के हवाले, भीड़ में भी बदमाशों का चेहरा पहचानेंगे कैमरे

रोजाना करीब 65 हजार यात्रियों की आवाजाही वाले ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर अब बदमाशों की पहचान करना और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखना आसान होगा। स्टेशन पर एआइ से लैस करीब 250 हाईटेक कैमरे लगाने की तैयारी है। इन कैमरों की खासियत यह होगी कि भीड़ के बीच छिपे संदिग्ध का चेहरा भी ...
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Oct 13, 2026
ai cam
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ग्वालियर. रोजाना करीब 65 हजार यात्रियों की आवाजाही वाले ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर अब बदमाशों की पहचान करना और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखना आसान होगा। स्टेशन पर एआइ से लैस करीब 250 हाईटेक कैमरे लगाने की तैयारी है। इन कैमरों की खासियत यह होगी कि भीड़ के बीच छिपे संदिग्ध का चेहरा भी जूम कर पहचानने में मदद मिलेगी। डेटाबेस में दर्ज अपराधी या संदिग्ध का चेहरा कैमरे की नजर में आते ही फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज सकेगा। रेलवे ने रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) के मानकों के अनुसार वायरिंग का काम भी शुरू कर दिया है। योजना में प्लेटफॉर्म से लेकर प्रवेश द्वार, फुट ओवरब्रिज, पार्किंग और सर्कुलेटिंग एरिया तक निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

बुजुर्गों से लेकर परिवार के साथ सफर करने वालों तक, सुरक्षा पर नजर

स्टेशन पर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी यह निगरानी व्यवस्था अहम होगी। प्लेटफॉर्म, वेटिंग हॉल, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसे स्थानों पर कैमरे लगने से यात्रियों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी। किसी बुजुर्ग को भीड़ में परेशानी होने, सामान छूटने या किसी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में संबंधित हिस्से की फुटेज देखकर मदद पहुंचाने में आसानी हो सकती है। हालांकि, आपात स्थिति में मदद के लिए रेलवे स्टाफ और सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई भी जरूरी होगी।

एंट्री गेट से प्लेटफॉर्म तक तीसरी आंख का पहरा

स्टेशन के मेन एंट्री गेट, कॉनकोर्स, ईस्ट डिपार्चर एंट्री और सभी प्लेटफॉर्म पर कैमरे लगाए जाएंगे। लिफ्ट और एस्केलेटर के अंदर भी निगरानी की व्यवस्था होगी। प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर 20 से 22 विभिन्न प्रकार के कैमरे लगाने की योजना है। प्लेटफॉर्म-1 और प्लेटफॉर्म-4 के दोनों ओर सर्कुलेटिंग एरिया में 30-30 कैमरे लगाए जाएंगे। फुट ओवरब्रिज पर चार से पांच कैमरे 200 से 250 मीटर तक के क्षेत्र की निगरानी कर सकेंगे।

बदमाशों पर नजर, पार्किंग में खड़े वाहनों की भी निगरानी

सुरक्षा का दायरा सिर्फ यात्रियों के आने-जाने तक सीमित नहीं रहेगा। पार्किंग में खड़े वाहनों, रेल कर्मचारियों और अधिकारियों की मल्टीस्टोरी बिल्डिंग तथा उनके आवासों के बाहर भी कैमरे लगाए जाएंगे। अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से एफआरएस, पीटीजेड, बुलेट और डोम कैमरों का इस्तेमाल होगा। पीटीजेड कैमरे चारों दिशाओं में घूमकर दूर तक की गतिविधियां दिखा सकेंगे, जबकि बुलेट कैमरे निश्चित दिशा और डोम कैमरे लिफ्ट, एस्केलेटर व वेटिंग हॉल जैसे स्थानों की निगरानी करेंगे।

अलग-अलग तकनीक, मकसद—सुरक्षित सफर

  • एफआरएस कैमरे: डेटाबेस में दर्ज चेहरों से मिलान कर संदिग्ध की पहचान करने और अलर्ट देने में मदद करेंगे।
  • पीटीजेड कैमरे: घूमकर अलग-अलग दिशाओं में निगरानी करेंगे और दूर की गतिविधियों को जूम कर दिखाएंगे।
  • बुलेट कैमरे: प्लेटफॉर्म, कॉरिडोर और अन्य निश्चित दिशाओं में निगरानी रखेंगे।
  • डोम कैमरे: लिफ्ट, एस्केलेटर और वेटिंग हॉल जैसे इनडोर स्थानों पर लगाए जाएंगे।

इनका कहना है

रेलवे स्टेशन पर हाईटेक कैमरे लगाने की योजना के तहत ड्राइंग तैयार हो गई है। करीब 250 कैमरे सभी प्लेटफॉर्म, सर्कुलेटिंग एरिया और आउटर क्षेत्र में लगाए जाएंगे। इससे सुरक्षा संबंधी कार्यों में एआइ तकनीक का उपयोग आसान होगा।
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी मंडल

Updated on:
13 Oct 2026 06:54 pm
Published on:
13 Oct 2026 05:23 pm