
colony peace
ग्वालियर. शहरवासियों ने जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर रिहायशी कॉलोनियों में आशियाना इसलिए बनाया था ताकि वे शहर के शोर-शराबे और ट्रैफिक से दूर सुकून और शांति से रह सकें। लेकिन नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के भ्रष्ट व लापरवाह सिस्टम ने इन शांत कॉलोनियों को भीड़भाड़ वाले अनियंत्रित कंक्रीट के बाजार में तब्दील कर दिया है। मकानों के भीतर धड़ल्ले से चल रहे अवैध अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, होटलों, वेयरहाउसों और डिलीवरी स्टोर्स के इस गंभीर मर्ज पर अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन, नगर निगम आयुक्त, स्मार्ट सिटी सीईओ, ग्वालियर विकास प्राधिकरण और एमपी हाउसिंग बोर्ड को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। अदालत के इस कड़े रुख से कॉलोनियों में अवैध रूप से कारोबार चला रहे भू-माफियाओं और उन पर मेहरबान अफसरों में हड़कंप मच गया है।
न फायर एनओसी, न पार्किंग: बड़े हादसे का अंदेशा
आवासीय कॉलोनियों में चलने वाले इन अवैध संस्थानों के पास न तो अपनी कोई अधिकृत पार्किंग है और न ही सुरक्षा के इंतजाम।
30 फीट की सड़कें बनीं पार्किंग, रहवासियों का जीना मुहाल
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की नजीर, लापरवाह अफसरों पर भी नकेल की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसलों (राजेंद्र कुमार बरजात्या बनाम यूपी आवास एवं विकास परिषद व अन्य) का हवाला देते हुए मांग की गई है कि रिहायशी क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को तुरंत सील किया जाए। साथ ही, कॉलोनी विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले उन जिम्मेदार इंजीनियरों और अफसरों के खिलाफ भी आपराधिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाए, जिन्होंने जेबें भरकर इन अवैध निर्माणों पर वर्षों से अपनी आंखें मूंद रखी थीं।
Updated on:
13 Oct 2026 05:57 pm
Published on:
13 Oct 2026 05:51 pm
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