
बंगाली समाज का दुर्गा पूजा महोत्सव 16 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। इसके लिए माता की प्रतिमा बनाने का काम जारी है।
ग्वालियर. शक्ति की आराधना, ढाक की गूंज, धुनुची नृत्य की थिरकन और मां दुर्गा के जयकारों से ग्वालियर में बंगाल की संस्कृति जीवंत होने जा रही है। बंगाली सोशल एंड कल्चरल एसोसिएशन सेंट्रल ग्वालियर (बीएससीए) की ओर से 34वें दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन 16 से 21 अक्टूबर तक फूलबाग स्थित मानस भवन में किया जाएगा। छह दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव में मां दुर्गा की आराधना के साथ पारंपरिक अनुष्ठान, पुष्पांजलि, आरती, भोग प्रसाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस बार धुनुची और ढाकी नृत्य उत्सव में बंगाल की पारंपरिक छटा बिखेरेंगे। आयोजन को अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए पूरे कार्यक्रम का प्रसारण एलईडी के माध्यम से किया जाएगा, वहीं सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण की व्यवस्था भी रहेगी। बीएससीए अध्यक्ष तपन के.दास, सचिव मृणाल के.रॉय और भोग प्रसाद सचिव संजय मजूमदार ने बताया कि महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उत्सव का शुभारंभ 16 अक्टूबर को महाषष्ठी के अवसर पर सुबह 10 बजे कल्पारम्भ और आगोमनी के साथ होगा। कल्पारम्भ में मां दुर्गा को घट में विराजमान होने के लिए आमंत्रित किया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा अपने परिवार के साथ धरती पर आती हैं। इसके बाद प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा, पुष्पांजलि, आरती और भोग प्रसाद का आयोजन होगा। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों से वातावरण भक्तिमय बनेगा।
धुनुची की थाप पर झूमेगा पंडाल, ढाक की गूंज बढ़ाएगी उत्साह
दुर्गा पूजा में धुनुची नृत्य का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। पारंपरिक धुनुची लेकर भक्त जब मां दुर्गा के समक्ष नृत्य करते हैं, तो पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर उठता है। इस बार भी धुनुची नृत्य के साथ ढाकी नृत्य विशेष आकर्षण रहेगा। बंगाली समाज की महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजकर मां की आराधना करेंगी। सह-सचिव रूपेंद्र सरकार और भोग प्रसाद सचिव संजय मजूमदार ने बताया कि महाषष्ठी के कल्पारम्भ से लेकर विजयादशमी के सिंदूर खेला तक दुर्गा पूजा की परंपराएं बंगाल ही नहीं, देश-विदेश में श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती हैं। ग्वालियर में भी इन दिनों बंगाल की सांस्कृतिक छटा देखने को मिलेगी।
काली माता की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगर
इधर, सुभाष नगर स्थित काली माता मंदिर, चार शहर का नाका पर भी प्रतिमा निर्माण का कार्य जारी है। कोलकाता से आए कारीगर मां काली की प्रतिमा तैयार करने में जुटे हैं। दुर्गा पूजा के साथ शहर में देवी आराधना की तैयारियां धार्मिक उल्लास को और बढ़ा रही हैं।
छह दिनों तक होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान
Updated on:
13 Oct 2026 11:31 am
Published on:
13 Oct 2026 11:30 am
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